प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 124वें एपिसोड में एक बार फिर स्वच्छता पर जोर दिया। उन्होंने ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के बारे में बात करते हुए कहा कि यह मिशन जल्द ही अपने 11 साल पूरे करने जा रहा है, लेकिन इसकी ताकत और जरूरत आज भी उतनी ही बनी हुई है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि जब पूरा देश एक सोच पर एकजुट हो जाता है, तो असंभव भी संभव हो जाता है, और ‘स्वच्छ भारत मिशन’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

स्वच्छ भारत मिशन की 11 साल की सफलता

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि ‘स्वच्छ भारत मिशन’ 11 सालों में एक जन आंदोलन बन चुका है। उन्होंने कहा, “कभी-कभी कुछ लोगों को कोई काम असंभव सा लगता है। वे सोचते हैं, क्या यह संभव भी होगा? लेकिन जब पूरा देश एक सोच पर एकजुट हो जाता है, तो असंभव भी संभव हो जाता है।”

स्वच्छ भारत मिशन की सफलता में जनभागीदारी की अहम भूमिका रही है। पीएम मोदी ने बताया कि अब यह मिशन केवल सरकार की पहल नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रयास बन चुका है। देशभर के शहर और कस्बे अपनी-अपनी जरूरतों और पर्यावरण के अनुसार स्वच्छता के अनूठे तरीकों को अपना रहे हैं। इस साल देश के 4500 से ज्यादा शहरों और कस्बों ने इसमें भाग लिया, और 15 करोड़ से ज्यादा लोग इस मिशन में शामिल हुए। यह संख्या देश की स्वच्छता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इसका महत्व किसी भी दृष्टिकोण से कम नहीं है।

देश के विभिन्न शहरों में स्वच्छता के अनूठे प्रयास

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छता के क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर किए गए महत्वपूर्ण प्रयासों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कीर्तिनगर के लोग पहाड़ों में कचरा प्रबंधन की एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं। इसी तरह, मंगलुरु में तकनीक का इस्तेमाल करके जैविक कचरे का प्रबंधन किया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश के रोइंग शहर में कचरा प्रबंधन की बड़ी चुनौती थी, लेकिन वहां के लोगों ने इसे अपनी जिम्मेदारी समझा और ‘ग्रीन रोइंग इनिशिएटिव’ शुरू किया। इस पहल के तहत रीसायकल किए गए कचरे से एक पूरा पार्क तैयार किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि कराड और विजयवाड़ा में जल प्रबंधन के कुछ अद्भुत उदाहरण सामने आए हैं। अहमदाबाद में रिवर फ्रंट की सफाई ने भी लोगों का ध्यान खींचा है और यह एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया है।

भोपाल की ‘सकारात्मक सोच’ टीम और गोमती नदी सफाई अभियान

‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भोपाल की ‘सकारात्मक सोच’ टीम की भी सराहना की, जो 200 महिलाओं की एक टीम है। यह टीम भोपाल के 17 पार्कों की सफाई कर रही है और इसके साथ ही जागरूकता भी फैला रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भोपाल के पार्कों की सफाई और कपड़े के थैले बांटना एक संदेश देता है। इन प्रयासों की वजह से भोपाल अब स्वच्छ सर्वेक्षण में काफी आगे बढ़ चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी ने लखनऊ की गोमती नदी सफाई टीम का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यह टीम पिछले 10 वर्षों से हर रविवार लगातार सफाई अभियान चला रही है और इसका प्रभाव बहुत सकारात्मक रहा है।

छत्तीसगढ़ और गोवा के स्वच्छता प्रयास

प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के बिल्हा की महिलाओं की भी सराहना की, जिन्होंने कचरा प्रबंधन का प्रशिक्षण लेकर शहर की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने गोवा के पणजी शहर का भी उल्लेख किया, जहां कचरे को 16 श्रेणियों में बांटा जाता है और इसका नेतृत्व भी महिलाएं ही कर रही हैं। इस प्रयास के कारण पणजी को ‘राष्ट्रपति पुरस्कार’ भी मिल चुका है।

स्वच्छता: एक सतत प्रयास

प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया कि स्वच्छता कोई एक दिन का या एक बार का काम नहीं है। यह एक सतत प्रयास है। जब हम हर दिन, हर पल स्वच्छता को प्राथमिकता देंगे, तभी हमारा देश स्वच्छ रहेगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत चल रहे प्रयासों को सफल बनाने के लिए हर नागरिक को अपना योगदान देना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम एक बार फिर स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करता है। 11 सालों में ‘स्वच्छ भारत मिशन’ ने जो जन आंदोलन का रूप लिया है, वह देश की स्वच्छता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और इसे एक निरंतर प्रक्रिया के रूप में अपनाएं।

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