15 जुलाई 2025 तक भारत में कुल 1,78,154 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) स्थापित हो चुके हैं। ये केंद्र आधिकारिक रूप से उप-स्वास्थ्य केंद्रों (एसएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के रूप में कार्य करते हैं और लोगों को व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर के माध्यम से संचारी रोगों, गैर-संचारी रोगों (एनसीडी), प्रजनन और बाल स्वास्थ्य सेवाओं, और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए निवारक, प्रोत्साहन, पुनर्वास और उपचारात्मक देखभाल प्रदान की जाती है।

स्वास्थ्य सत्र और गतिविधियां

आयुष्मान आरोग्य मंदिर में न केवल स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं, बल्कि योग, साइकिलिंग और ध्यान जैसी स्वास्थ्य-प्रेरक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं। 30 जून 2025 तक, कुल 5.73 करोड़ स्वास्थ्य सत्र आयोजित किए जा चुके हैं, जो लोगों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद कर रहे हैं।

निःशुल्क जांच सेवा पहल (एफडीएसआई) का उद्देश्य और सेवाएं

2015 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत निःशुल्क जांच सेवा पहल (एफडीएसआई) कार्यक्रम शुरू किया था। इसका उद्देश्य समुदाय के निकट सुलभ और किफायती रोग-संबंधी और रेडियोलॉजिकल निदान सेवाएं प्रदान करना है। इस पहल के माध्यम से उप-केंद्रों पर 14 और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 63 परीक्षण प्रदान किए जा रहे हैं।

एफडीएसआई कार्यक्रम स्वास्थ्य प्रोत्साहन और निवारक देखभाल को बढ़ावा देता है, जो प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल का अभिन्न हिस्सा हैं। इसके साथ ही, सरकार द्वारा प्रदत्त निःशुल्क निदान सेवाओं ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम)

(एबीडीएम) का उद्देश्य एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म तैयार करना है जो स्वास्थ्य इको-सिस्टम के भीतर स्वास्थ्य डेटा की अंतर-संचालनीयता को सक्षम बनाए। इस मिशन के तहत प्रत्येक नागरिक का अनुदैर्ध्य इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (EHR) तैयार किया जा रहा है ताकि स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ, किफायती, और सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच अधिक प्रभावी हो सकें।

अब तक 79.75 करोड़ आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (ABHA) आईडी बनाए जा चुके हैं और 65.34 करोड़ इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (EHR) लिंक किए जा चुके हैं, जिससे नागरिकों को स्वास्थ सेवाएं प्राप्त करने में और अधिक सुविधा हो रही है।

स्थापना और रखरखाव की लागत

आयुष्मान आरोग्य मंदिर की स्थापना और रखरखाव की अनुमानित लागत लगभग 17.03 लाख रुपए है, जिसमें एकमुश्त लागत और एक वर्ष की आवर्ती लागत शामिल है। इन केंद्रों की स्थापना और रखरखाव के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत बजट मंजूर किया जाता है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (पीआईपी) के अनुसार, एनएचएम कार्यवाही रिकॉर्ड (आरओपी) के अंतर्गत अनुमोदन प्राप्त किया जाता है।

स्वास्थ्य सुधार में योगदान

आयुष्मान आरोग्य मंदिर का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है, जिससे हर व्यक्ति को आधुनिक और सस्ती स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं मिल सकें। इसके अलावा, ये केंद्र प्रारंभिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करके स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करते हैं। यह प्रतिक्रियात्मक स्वास्थ्य देखभाल के बजाय निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है, जिससे स्वास्थ्य लागत में भी कमी आती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की दीर्घकालिक योजनाएं

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और डिजिटल मिशन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इन पहलों से न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार होगा, बल्कि रोजगार के अवसर और सामाजिक कल्याण में भी बढ़ोत्तरी होगी।

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