प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर कर्तव्य भवन-03 का उद्घाटन किया। यह सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बनने वाले दस कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरियट भवनों में से पहला भवन है। इस ऐतिहासिक मौके पर केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल भी मौजूद रहे।

850 दफ्तरों से सुसज्जित, 1.5 लाख वर्ग मीटर में फैला भवन

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने जानकारी दी कि यह अत्याधुनिक भवन 1.5 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है और इसमें 850 कार्यालय कक्ष बनाए गए हैं। इसमें दो बेसमेंट, भूतल, और सात मंजिलें हैं। इसका उद्देश्य भारत के मंत्रालयों को एक ही छत के नीचे लाकर प्रशासनिक कार्यों को तेज और समन्वित करना है।

2026 तक पूरे मंत्रालय होंगे शिफ्ट

सरकार ने जानकारी दी है कि 31 दिसंबर 2025 तक बाकी सभी भवनों का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा और 30 अप्रैल 2026 तक सभी मंत्रालयों को नवनिर्मित भवनों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, गति और उत्तरदायित्व बढ़ेगा।

पुराने भवनों की जगह लेगा कर्तव्य भवन-03

अभी तक गृह, विदेश, कृषि, उद्योग और अन्य मंत्रालय शास्त्री भवन, कृषि भवन, निर्माण भवन जैसी पुरानी और अब कमजोर हो चुकी इमारतों से संचालित हो रहे थे। कर्तव्य भवन-03 जैसी नई इमारतें मंत्रालयों को एक ही परिसर में लाकर कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाएंगी।

आधुनिक और हरित भवन की विशेषताएं

कर्तव्य भवन-03 को एक ग्रीन बिल्डिंग के रूप में डिजाइन किया गया है जिसे GRIHA-4 रेटिंग प्राप्त है। इसमें निम्नलिखित हरित तकनीकें शामिल हैं:

  • डबल-ग्लेज़्ड कांच से बेहतर ताप नियंत्रण
  • रूफटॉप सोलर पैनल से सालाना 5.34 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन
  • सोलर वॉटर हीटर, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, और
  • स्मार्ट लिफ्ट्स, सेंसर आधारित लाइटिंग सिस्टम
  • 30% तक कम ऊर्जा की खपत
  • इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन, कचरा प्रबंधन प्लांट, और रिसाइकल्ड मटीरियल का उपयोग
  • शून्य अपशिष्ट नीति को अपनाया गया है

इन मंत्रालयों के लिए तैयार किया गया भवन

कर्तव्य भवन-03 में निम्नलिखित मंत्रालयों के कार्यालय होंगे:

  • गृह मंत्रालय
  • विदेश मंत्रालय
  • ग्रामीण विकास मंत्रालय
  • एमएसएमई मंत्रालय
  • कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
  • प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय

प्रदर्शनी में भवन की खूबियों की झलक

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया, जिसमें भवन के निर्माण, ऊर्जा दक्षता, डिज़ाइन और पारिस्थितिकीय संतुलन की विशेषताओं को दर्शाया गया। यह प्रदर्शनी भविष्य की सरकारी इमारतों के लिए एक रोल मॉडल के रूप में कार्य करेगी।

कर्तव्य भवन-03: आत्मनिर्भर भारत और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का प्रतीक

यह भारत के प्रशासनिक भविष्य और सतत विकास लक्ष्यों की ओर बढ़ते कदम का प्रतीक है। पारंपरिक इमारतों की तुलना में यह भवन कम ऊर्जा, कम संसाधन, और अधिक उत्पादकता को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

कर्तव्य भवन-03 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच को दर्शाता है, जो भारत को 21वीं सदी में एक सशक्त, आत्मनिर्भर और टिकाऊ राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है। यह भवन एक ऐसी दिशा में कदम है, जहां शासन, पर्यावरण और तकनीक एक साथ चलें।

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