“राज्यसभा में बुधवार को पूर्व राज्यपाल और दो बार राज्यसभा सांसद रहे सत्यपाल मलिक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह ने उनकी स्मृति में सदन में मौन रखवाया और उन्हें एक योग्य प्रशासक, सांसद और राजनेता बताया।“
राजनीतिक सफर की झलक:
- सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई 1946 को हुआ था।
- 1974 में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की।
- 1982 और 1989 में दो बार राज्यसभा सदस्य रहे।
- 9वीं लोकसभा में अलीगढ़ से सांसद चुने गए थे।
- वह बिहार, गोवा, मेघालय और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों के राज्यपाल रह चुके हैं।
- उन्होंने ओडिशा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था।
निधन और बीमारी:
- सत्यपाल मलिक का निधन 5 अगस्त को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में हुआ।
- वह किडनी की बीमारी से पीड़ित थे और लंबे समय से इलाज चल रहा था।
- निधन के समय उनकी आयु 79 वर्ष थी।
बेबाक और स्पष्ट वक्ता:
सत्यपाल मलिक कृषि आंदोलन समेत कई विवादित राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी खुली राय रखने के लिए जाने जाते थे। वह सदैव जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रहते थे।
सदन में हंगामा भी हुआ:
श्रद्धांजलि के तुरंत बाद, सदन में बिहार की मतदाता सूची को लेकर विपक्ष द्वारा हंगामा किया गया। 35 सांसदों ने नियम 267 के तहत विभिन्न विषयों पर चर्चा की मांग की, जिसे उपसभापति ने नियमों के तहत खारिज कर दिया, और सदन को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
सत्यपाल मलिक एक ऐसे नेता थे, जिनकी राजनीतिक समझ, प्रशासनिक अनुभव और बेबाक शैली ने उन्हें अलग पहचान दी। राज्यसभा में दी गई श्रद्धांजलि देश की राजनीति में उनके योगदान की मान्यता है। उनका जाना भारत की राजनीतिक और प्रशासनिक दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति है।
