“संसद का सोमवार का सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। संसद की कार्यवाही बाधित होने के कारण लोकसभा और राज्यसभा, दोनों को 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। विपक्ष ने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के गहन रिव्यू और अन्य मुद्दों पर तुरंत चर्चा की मांग की, जिससे माहौल गरमा गया।“
विपक्ष की मांगें और नारेबाजी
राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने सभी अन्य कार्यों को रोककर पहले इन मुद्दों पर चर्चा कराने का नोटिस दिया। जब यह नोटिस अस्वीकृत किया गया, तो विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे। स्थिति बिगड़ने पर सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा में भी हाल कुछ ऐसा ही था। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद वेल में आ गए और जोरदार नारेबाजी करने लगे।
अध्यक्ष की अपील बेअसर
लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार विपक्षी सांसदों से अपनी सीटों पर लौटने का अनुरोध किया, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। अंततः, बढ़ते शोर-शराबे के कारण लोकसभा की कार्यवाही भी 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
राज्यसभा में 29 नोटिस और नियम 267
उपसभापति हरिवंश नारायण ने बताया कि उन्हें सोमवार को चर्चा के लिए नियम 267 के तहत 29 नोटिस प्राप्त हुए हैं। इस नियम के तहत सदन की शेष सभी कार्यवाही रोककर संबंधित विषय पर चर्चा होती है और चर्चा के बाद वोटिंग का प्रावधान भी है।
नोटिस खारिज होने के कारण
उपसभापति ने स्पष्ट किया:
- 11 नोटिस नियमों के अनुरूप नहीं थे।
- 18 में से कई नोटिस ऐसे मुद्दों पर थे जिनकी सुनवाई अदालत में चल रही है।
- अदालत में लंबित मामलों पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती।
इन कारणों से सभी नोटिस अस्वीकृत कर दिए गए।
विपक्ष का विरोध और बैच पहनकर प्रदर्शन
नोटिस खारिज होने पर विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। कुछ सांसद बैच पहनकर विरोध जताने आए थे, जिस पर उपसभापति ने आपत्ति जताई और कहा कि सदन में ऐसा करना अनुमति के दायरे में नहीं है।
नारेबाजी और स्थगन
नोटिस खारिज होने के बाद विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और तेज हो गई। स्थिति पर काबू न पाते हुए उपसभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही भी 2 बजे तक स्थगित करने की घोषणा की।
संसद में लगातार गतिरोध
यह घटनाक्रम एक बार फिर संसद में जारी गतिरोध को उजागर करता है। सत्र के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच टकराव आम हो गया है, जिससे कई अहम विधेयक और चर्चाएं अटक जाती हैं।
नियम 267 का महत्व
नियम 267 भारतीय संसद के कार्य संचालन नियमों का अहम हिस्सा है। यह प्रावधान सदन को किसी विशेष मुद्दे पर तुरंत ध्यान केंद्रित करने का अधिकार देता है, लेकिन इसके दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए अक्सर नोटिस अस्वीकार कर दिए जाते हैं।
आगे की स्थिति
देखना यह होगा कि दोपहर 2 बजे के बाद सदनों की कार्यवाही सामान्य रूप से चल पाती है या नहीं। विपक्ष अपने रुख पर अड़ा है और सरकार अपनी प्राथमिकताओं के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
