“बिहार में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के बाद अब विरोध की गूंज दिल्ली तक पहुँच गई है। संसद के मानसून सत्र के बीच विपक्षी दलों ने राजधानी की सड़कों पर ‘वोट चोरी विरोध मार्च’ निकाला। इंडी गठबंधन (INDI Alliance) के नेताओं ने संसद भवन से चुनाव आयोग के कार्यालय तक पैदल मार्च किया।“
मार्च में शामिल बड़े नेता
इस विरोध मार्च में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा, और कई अन्य विपक्षी नेता शामिल थे।
मार्च का उद्देश्य
- चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग
- मतदाता सूची की समीक्षा
- कथित वोट चोरी पर कार्रवाई
- लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा
TMC सांसद बेहोश, महुआ मोइत्रा की तबीयत बिगड़ी
मार्च के दौरान अचानक तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद मिताली बाग की तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गईं। वहीं, महुआ मोइत्रा की हालत भी खराब हो गई। इस पर राहुल गांधी ने तुरंत उनकी मदद की और उन्हें अस्पताल भेजने की व्यवस्था की।
राहुल-प्रियंका हिरासत में
संसद से चुनाव आयोग तक निकल रहे मार्च के दौरान पुलिस ने रास्ते में कई जगह बैरिकेडिंग कर रखी थी। मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया।
अखिलेश यादव का बैरिकेड कूदना
मार्च के दौरान सबसे चर्चित घटना रही समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का बैरिकेड कूदना। पुलिस ने रास्ता रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाई थी, लेकिन अखिलेश यादव उसे कूदकर आगे निकल गए। बाद में पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया।
सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने इस विरोध मार्च के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए थे।
- पूरे मार्ग पर पुलिस बल की तैनाती
- संसद से चुनाव आयोग तक बैरिकेडिंग
- ट्रैफिक डायवर्जन और निगरानी
विपक्ष की मांगें
विपक्षी दलों ने कहा कि:
- चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से काम करे।
- मतदाता सूची का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
- चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए।
संसद में भी उठा मुद्दा
विपक्षी सांसदों ने संसद के भीतर भी ‘वोट चोरी’ और चुनाव आयोग की भूमिका पर चर्चा की मांग की, लेकिन अनुमति न मिलने पर वे सड़क पर उतर आए।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें और वीडियो
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी की पुलिस हिरासत और अखिलेश यादव के बैरिकेड कूदने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। समर्थक और विरोधी दोनों ही इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
राजनीतिक असर
विश्लेषकों का मानना है कि यह विरोध मार्च आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
- विपक्ष एकजुट होकर चुनाव आयोग पर दबाव बना रहा है।
- बीजेपी ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया है।
