“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने हाल ही में पश्चिम बंगाल की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संघ का कहना है कि पश्चिम बंगाल में हिंसा बार-बार क्यों होती है, इस पर समाज और सरकार दोनों को गहराई से विचार करना चाहिए।“
संघ का मानना है कि यह हिंसा केवल राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि “संरक्षण” की वजह से भी जारी रहती है। आरएसएस ने लोगों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर चर्चा करें और समाधान खोजने की दिशा में आगे बढ़ें।
आरएसएस पश्चिम बंगाल हिंसा पर चिंता
पश्चिम बंगाल लंबे समय से राजनीतिक हिंसा का गढ़ रहा है। आरएसएस ने इस पर सीधी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस प्रदेश में बार-बार हिंसा होती है, वहाँ कानून-व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
सक्रिय शाखाएं
संघ ने यह भी बताया कि वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल में उसकी 2018 शाखाएं सक्रिय हैं और संगठन ने अक्टूबर तक देशभर में 1 लाख शाखाएं स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
जनसंख्या नीति पर आरएसएस का रुख
संघ का मानना है कि भारत को केवल जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यकता नहीं है, बल्कि एक समग्र जनसंख्या नीति बनाई जानी चाहिए। यह नीति सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए, जिससे किसी वर्ग या समुदाय के साथ भेदभाव न हो।
संगठन की संरचना और सेवानिवृत्ति का मुद्दा
आरएसएस ने यह स्पष्ट किया है कि उसके पास कोई ऐसा संविधान नहीं है, जिसमें 75 वर्ष की आयु पूरी होने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रावधान हो। संघ का कहना है कि हर संगठन को अपनी स्वायत्तता के साथ कार्य करने की आज़ादी होनी चाहिए और किसी पर कोई नियम थोपा नहीं जा सकता।
आरएसएस और भाजपा: संबंध व राजनीतिक स्थिति
संघ ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की सीटों की संख्या बढ़ने को उल्लेखनीय बताया, लेकिन सत्ता में आने की संभावना को अलग विषय करार दिया।
भाजपा की स्थिति
बंगाल में भाजपा ने पिछले चुनावों में 72-75 सीटें पाई थीं, जिसे संघ ने एक बड़ी उपलब्धि माना। हालांकि, सत्ता प्राप्ति संघ के लिए उतनी महत्वपूर्ण नहीं, जितनी राष्ट्रीय एकता और सामाजिक स्थिरता।
नागरिक अधिकार और राष्ट्रीय निष्ठा
आरएसएस ने स्पष्ट किया कि भारत में रहने वाले सभी नागरिकों को स्वतंत्रता के साथ जीने का अधिकार है। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के प्रति निष्ठा पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
- भारत में गैर-हिंदुओं को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।
- वहीं, बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
भाषा और राष्ट्रीय एकता का मुद्दा
संघ का मानना है कि संपर्क भाषा एक हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीय भाषाएं अनेक हो सकती हैं। उन्होंने इस बात पर भी असंतोष जताया कि पश्चिम बंगाल में “राजधर्म” का पालन ठीक से नहीं हो रहा है और राज्य सरकार से वे खुश नहीं हैं।
केंद्र और राज्य संबंध
संघ ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें एक-दूसरे की दुश्मन नहीं हो सकतीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि संघ ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी (प्रणब दा) से भी बांग्लादेश और नेपाल पर नीतिगत मुद्दों पर चर्चा की थी।
आरएसएस का अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण
चीन और अन्य देशों से संबंधों पर संघ का रुख स्पष्ट है। संघ का कहना है कि किसी भी देश से स्थायी दुश्मनी रखना उचित नहीं है। भारत को सभी देशों के साथ संबंध रखने चाहिए, लेकिन यह संबंध तभी महत्वपूर्ण हैं, जब राष्ट्र की सर्वोच्चता सुरक्षित रहे।
