डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में एक अहम मोड़ सामने आया है। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम समर्थन को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने शिवसेना (शिंदे गुट) को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस फैसले को नगर निगम में सत्ता गठन की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। KDMC चुनाव के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। पार्टी के पास पहले से 53 पार्षद थे। अब MNS के 5 पार्षदों के समर्थन से यह संख्या 58 तक पहुंच गई है। इस कल्याण-डोंबिवली नगर निगम समर्थन ने महायुति की स्थिति को और मजबूत कर दिया है।
MNS के पूर्व विधायक प्रमोद राजू पाटिल ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह निर्णय पूरी तरह शहर के विकास को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने साफ किया कि बेहतर प्रशासन, बुनियादी सुविधाएं और तेज विकास कार्य ही इस समर्थन का मुख्य उद्देश्य है। शिंदे गुट की शिवसेना को इस समर्थन से राजनीतिक संबल मिला है। वहीं, उद्धव ठाकरे गुट के लिए यह घटनाक्रम झटके के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कुछ और पार्षदों के पाला बदलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। भाजपा के साथ मिलकर महायुति का मेयर बनाने की तैयारी है। हालांकि ढाई-ढाई साल के मेयर कार्यकाल को लेकर चर्चा अब भी जारी है। कुल मिलाकर कल्याण-डोंबिवली नगर निगम समर्थन ने महाराष्ट्र की नगर राजनीति को नई दिशा दे दी है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में MNS ने किसे समर्थन दिया है?
उत्तर: MNS ने शिवसेना (शिंदे गुट) को समर्थन दिया है।
प्रश्न 2: इस समर्थन से शिवसेना के पास कितने पार्षद हो गए हैं?
उत्तर: शिवसेना के पास अब कुल 58 पार्षदों का समर्थन हो गया है।
प्रश्न 3: MNS ने यह फैसला क्यों लिया?
उत्तर: पार्टी के अनुसार, यह फैसला शहर के विकास और स्थिर प्रशासन के लिए लिया गया है।

