भारतीय बंदरगाह पर खड़े चावल कंटेनर और निर्यात जांच से जुड़ा प्रतीकात्मक दृश्य।चीन द्वारा भारतीय चावल खेप रिजेक्ट किए जाने के बाद बढ़ी निर्यातकों की चिंता।

भारत के नॉन बासमती चावल निर्यात को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। चीन लगातार भारतीय चावल की खेपों को रिजेक्ट कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक करीब 70 भारतीय खेपों को वापस लौटाया जा चुका है। चीन का आरोप है कि इन खेपों में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म यानी GMO के अंश मिले हैं। हालांकि भारत सरकार ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR ने साफ कहा है कि देश में जीएम चावल की खेती नहीं होती। भारत में केवल बीटी कॉटन की व्यावसायिक खेती की अनुमति है। इसके बावजूद चीन की कार्रवाई से नॉन बासमती चावल निर्यात करने वाले कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।

व्यापार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की यह सख्ती केवल गुणवत्ता जांच तक सीमित नहीं हो सकती। कई कारोबारी इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की बढ़ती ताकत को कमजोर करने की रणनीति मान रहे हैं। भारत दुनिया के बड़े चावल निर्यातकों में शामिल है और एशियाई बाजार में उसकी पकड़ लगातार मजबूत हुई है। बताया जा रहा है कि कई भारतीय निर्यातकों ने फिलहाल अपने करीब 200 कंटेनरों को रोक दिया है ताकि आगे नुकसान से बचा जा सके। वहीं भारत और चीन के अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत भी जारी है। भारतीय पक्ष ने चीन से जांच प्रक्रिया और तकनीकी आधार की जानकारी मांगी है, लेकिन अभी तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

FAQ

सवाल: चीन भारतीय चावल की खेप क्यों लौटा रहा है?

जवाब: चीन का दावा है कि भारतीय चावल में GMO के अंश पाए गए हैं।

सवाल: क्या भारत में जीएम चावल की खेती होती है?

जवाब: नहीं, भारत सरकार के अनुसार देश में जीएम चावल की खेती को मंजूरी नहीं है।

सवाल: इसका सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ेगा?

जवाब: इसका असर भारतीय नॉन बासमती चावल निर्यात और निर्यातकों के कारोबार पर पड़ सकता है।

Prem Chand | Suryoday Samachar

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