E20 Petrol Consumer Court Verdict :- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में E20 पेट्रोल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (कंज्यूमर कोर्ट) ने मारुति सुजुकी को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 45 दिनों के भीतर नई ग्रैंड विटारा (Strong Hybrid Zeta Plus) कार उपलब्ध कराए या लगभग ₹20.5 लाख की राशि वापस करे।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने जून 2024 में मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड ज़ेटा प्लस खरीदी थी। कुछ समय बाद वाहन में तकनीकी खराबी आने लगी। जांच के दौरान वाहन में मौजूद ईंधन का परीक्षण सरकारी प्रयोगशाला में कराया गया, जिसमें एथेनॉल मिश्रित E20 ईंधन होने की पुष्टि हुई।
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रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ईंधन में एथेनॉल के अलग (Phase Separation) होने के कारण उसकी प्रभावी मात्रा लगभग 6–7 प्रतिशत रह गई थी। उपभोक्ता आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि वाहन का इंजन इस प्रकार के ईंधन के अनुरूप कार्य नहीं कर पाया और उपभोक्ता को नुकसान उठाना पड़ा।
इसी आधार पर आयोग ने मारुति सुजुकी को वाहन बदलने या पूरी कीमत लौटाने का आदेश दिया। इस फैसले को E20 ईंधन से जुड़े उपभोक्ता मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
हालांकि, मारुति सुजुकी ने इस आदेश से असहमति जताते हुए कहा है कि वह कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगी और फैसले को उच्च मंच पर चुनौती देगी। इसलिए यह मामला अभी अंतिम रूप से समाप्त नहीं माना जा सकता।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में E20 पेट्रोल को लेकर देशभर में चर्चा तेज रही है। एक ओर कुछ शोधों में E20 ईंधन को आधुनिक वाहनों के लिए सुरक्षित बताया गया है, वहीं दूसरी ओर कुछ उपभोक्ताओं ने माइलेज और इंजन प्रदर्शन को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं। ऐसे में यह मामला भविष्य में E20 ईंधन और वाहन अनुकूलता को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है।
