India China Trade 2026 :- भारत और चीन के बीच व्यापार ने 2026 की पहली छमाही (जनवरी–जून) में नया रिकॉर्ड बनाया है। ताजा व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच आयात और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक संबंध मजबूत बने हुए हैं।
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी–जून 2026 के दौरान भारत का चीन से माल आयात (Merchandise Imports) बढ़कर 79.41 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया, जबकि जनवरी–जून 2025 में यह 65.2 अरब डॉलर था। यानी एक वर्ष में आयात में करीब 21.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
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वहीं, भारत का चीन को माल निर्यात (Merchandise Exports) भी बढ़ा है। जनवरी–जून 2026 में निर्यात 12.31 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि इसी अवधि में 2025 में यह 8.97 अरब डॉलर था। इस तरह निर्यात में लगभग 37 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली।
हालांकि, आयात की तुलना में निर्यात अभी भी काफी कम है। इसके चलते भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) चीन के साथ ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब भी इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रसायन, सोलर उपकरण और औद्योगिक कच्चे माल जैसी कई महत्वपूर्ण वस्तुओं के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है।
दूसरी ओर, भारत से चीन को मुख्य रूप से लौह अयस्क, पेट्रोकेमिकल उत्पाद, कृषि उत्पाद, खनिज और कुछ इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात किया जाता है। निर्यात में बढ़ोतरी भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग का संकेत मानी जा रही है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि व्यापारिक संबंधों में आई यह वृद्धि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को दर्शाती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत को दीर्घकाल में व्यापार घाटा कम करने के लिए घरेलू विनिर्माण (Manufacturing) को और मजबूत करना होगा तथा निर्यात का दायरा बढ़ाना होगा।
भारत सरकार भी ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाओं के माध्यम से आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।
