अफगान शरणार्थियों की वापसी का दृश्य इस्लाम कला बॉर्डर परईरान से अफगानिस्तान लौटते नागरिकों की भीड़

तालिबान शासन द्वारा शरणार्थियों से स्वदेश लौटने की लगातार अपील और ईरान व पाकिस्तान द्वारा गैर-कानूनी प्रवासियों पर सख्ती के बाद अफगान शरणार्थियों की घर वापसी में तेज़ी देखी जा रही है।

बुधवार को अफगानिस्तान के ‘हाई कमीशन फॉर एड्रेसिंग रिटर्नी’ ने जानकारी दी कि 1,685 अफगान परिवारों के 7,474 सदस्य एक ही दिन में ईरान और पाकिस्तान से अफगानिस्तान लौट आए हैं।

प्रवेश बिंदु: प्रमुख सीमा चौकियों से हुई वापसी

लौटने वाले अफगान नागरिकों ने चार प्रमुख सीमा चौकियों से अफगानिस्तान में प्रवेश किया:

  • तोरखम बॉर्डर (नंगरहार प्रांत)
  • स्पिन बोल्दक बॉर्डर (कंधार)
  • इस्लाम कला बॉर्डर (हेरात)
  • पुल-ए-अब्रेशम बॉर्डर (निमरोज)

उच्चायोग के अनुसार, सभी लौटने वाले शरणार्थियों को अस्थायी आश्रय, भोजन, पीने का पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और उनके गृहनगर तक यात्रा की सुविधा प्रदान की जा रही है।

70 लाख अफगान शरणार्थी विदेशों में, अधिकांश बिना दस्तावेज़

वर्तमान समय में अनुमानित 70 लाख अफगान शरणार्थी विदेशों में रह रहे हैं:

  • इनमें से बहुत से लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं है
  • अधिकांश शरणार्थी ईरान और पाकिस्तान में निवास कर रहे हैं
  • दोनों देशों ने गैर-कानूनी प्रवासियों को स्वदेश लौटने का अल्टीमेटम दिया है

तालिबान का संदेश: देश लौटें, पुनर्निर्माण में भाग लें

तालिबान नेतृत्व लगातार शरणार्थियों से अपील कर रहा है कि वे:

  • विदेश में रहने की बजाय देश लौटें
  • अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में योगदान करें
  • अपने भविष्य और देश के भविष्य के लिए एकजुट हों

तालिबान सरकार सुविधाएं और सुरक्षा का भरोसा दिला रही है, ताकि प्रवासियों को लौटने में कोई भय न हो।

ईरान में हालात बिगड़े, वापसी दर में उछाल

ईरान से शरणार्थियों की वापसी की दर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
इस्लाम कला बॉर्डर पर स्थित अधिकारी अब्दुल रहीम रहमानी के अनुसार:

“ईरान में युद्ध और असुरक्षा के कारण, प्रतिदिन 8,000 से 10,000 अफगान नागरिक इस्लाम कला सीमा चौकी के जरिए हेरात प्रांत में प्रवेश कर रहे हैं।”

वहीं, निमरोज प्रांत के जरिए रोजाना 2,000 से 3,000 शरणार्थी देश लौट रहे हैं।

शरणार्थियों की वापसी: क्या यह स्थायी समाधान है?

हालांकि अफगानिस्तान लौटने वाले शरणार्थियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन:

  • देश में आर्थिक संकट, रोजगार की कमी और महिलाओं की शिक्षा व अधिकारों पर प्रतिबंध जैसी समस्याएं बनी हुई हैं
  • तालिबान सरकार ने अस्थायी राहत और मूलभूत सेवाओं की बात कही है, लेकिन लंबी अवधि में पुनर्वास की सफलता पर संशय बना हुआ है

अफगान शरणार्थियों की वापसी फिलहाल एक दोहरी तस्वीर प्रस्तुत करती है:

  • एक ओर तालिबान की अपील और राष्ट्र के पुनर्निर्माण का वादा
  • दूसरी ओर ईरान और पाकिस्तान में असुरक्षा और सख्ती से उत्पन्न मजबूरी

भविष्य में यह देखना अहम होगा कि अफगान सरकार किस हद तक इन लौटे नागरिकों को सुरक्षित, स्थिर और सम्मानजनक जीवन दे पाती है।

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