दिल्ली एम्स (AIIMS Delhi) में हर दिन हजारों मरीज, डॉक्टर और आगंतुक आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए AIIMS Security Training की शुरुआत की गई। यह प्रशिक्षण दिल्ली पुलिस अकादमी, झड़ोदा कलां में आयोजित किया गया, जहाँ सुरक्षा जवानों को विशेष पुलिस कौशल सिखाए गए।

प्रशिक्षण का उद्देश्य: अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य एम्स की सुरक्षा प्रणाली को और भी मज़बूत बनाना है। हर दिन हजारों मरीज और उनके परिजन अस्पताल आते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की सुरक्षा चूक मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है। इसलिए AIIMS Security Training ने सुरक्षा जवानों को बेहतर तकनीकी और मानसिक तैयारी से लैस किया है।

पहला बैच और उसकी सफलता

6 अगस्त 2025 को प्रशिक्षण का पहला बैच पूरा हुआ। इसमें 30 सुरक्षा जवानों ने भाग लिया और एक महीने तक चले विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसमें उन्हें अस्पताल से जुड़ी विशेष परिस्थितियों में सुरक्षा प्रबंधन, आगंतुक नियंत्रण और आपातकालीन प्रबंधन की गहन जानकारी दी गई।

AIIMS Security Training के तहत मिले कौशल

सुरक्षा कौशल और निगरानी तकनीक

सुरक्षा जवानों को निगरानी उपकरणों के सही इस्तेमाल और सुरक्षा खामियों को पहचानने की ट्रेनिंग दी गई। इससे अस्पताल के संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा और मजबूत होगी।

भीड़ नियंत्रण और कतार प्रबंधन

एम्स में रोज़ाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिवार आते हैं। ऐसे में भीड़ को संभालना और कतारों को व्यवस्थित करना जरूरी होता है। प्रशिक्षण में जवानों को इसके व्यावहारिक तरीके सिखाए गए।

आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सहायता

अस्पतालों में अचानक आग लगने, भूकंप या अन्य आपदाओं की स्थिति बन सकती है। ऐसे समय पर सुरक्षा जवानों की भूमिका अहम होती है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें निकासी प्रक्रियाओं और आपातकालीन चिकित्सा सहायता से जुड़ी जानकारी दी गई।

आतंकवादी खतरे और वीवीआईपी सुरक्षा

दिल्ली एम्स में कई बार वीवीआईपी शख्सियतें आती हैं। उनकी सुरक्षा एक बड़ा विषय होता है। AIIMS Security Training में जवानों को आतंकवादी खतरों से निपटने और वीवीआईपी सुरक्षा उपायों की ट्रेनिंग दी गई।

नैतिक और मानसिक मजबूती पर जोर

प्रशिक्षण केवल शारीरिक और तकनीकी स्तर पर ही नहीं बल्कि मानसिक और नैतिक स्तर पर भी दिया गया। इसमें निम्नलिखित विषयों पर खास ध्यान दिया गया:

  • नैतिक आचरण और सत्यनिष्ठा
  • लैंगिक संवेदनशीलता और उत्पीड़न विरोधी नियम
  • ग्राहक सेवा शिष्टाचार और सॉफ्ट स्किल्स
  • टीमवर्क और अनुशासन
  • घटना रिपोर्ट लेखन और डॉक्यूमेंटेशन

इन सभी पहलुओं ने जवानों को न केवल सुरक्षा बल्कि व्यवहारिक दृष्टि से भी मजबूत बनाया।

AIIMS Security Training से मिलने वाले फायदे

  • आपातकालीन स्थितियों में तेज और सही प्रतिक्रिया
  • आगंतुकों और मरीजों के लिए सुरक्षित वातावरण
  • अस्पताल के संवेदनशील इलाकों की अतिरिक्त सुरक्षा
  • वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान बेहतर प्रबंधन
  • कानून और व्यवस्था की गहरी समझ

इस प्रशिक्षण के बाद जवानों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

प्रशासन की भूमिका और अधिकारियों की सराहना

AIIMS Security Training का आयोजन मुख्य सुरक्षा अधिकारी के अथक प्रयास और एम्स निदेशक व उपनिदेशक के दिशा-निर्देशों पर हुआ। प्रशिक्षण पूरा होने पर अधिकारियों ने सभी प्रशिक्षित जवानों को बधाई दी और उन्हें प्रेरित किया कि वे अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को और भी ऊंचे स्तर पर ले जाएं।

AIIMS Security Training का दीर्घकालिक प्रभाव

इस प्रशिक्षण का असर सिर्फ तत्कालीन सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। इससे एम्स में लंबे समय तक एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार होगा। जवान अब किसी भी प्रकार की आपात स्थिति, आतंकी खतरे, आग या भीड़ नियंत्रण की चुनौती का सामना करने में सक्षम होंगे।

दिल्ली एम्स में AIIMS Security Training एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ है। इस पहल ने न केवल अस्पताल की सुरक्षा को नई मजबूती दी है, बल्कि मरीजों, डॉक्टरों और कर्मचारियों में भी सुरक्षा को लेकर विश्वास बढ़ाया है। भविष्य में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अन्य बड़े अस्पतालों और संस्थानों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकते हैं।

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