“ भारत के सबसे पवित्र धार्मिक तीर्थों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय रास्तों से होकर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस बार सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है – पूरे यात्रा मार्ग को नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है।“
नो-फ्लाइंग जोन: क्या है यह फैसला और क्यों जरूरी है?
ड्रोन, UAV, गुब्बारों पर पूर्ण प्रतिबंध
केंद्र शासित प्रदेश के गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 1 जुलाई से 10 अगस्त 2025 तक पूरे अमरनाथ यात्रा मार्ग पर किसी भी तरह के हवाई उपकरण का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। इसमें शामिल हैं:
- ड्रोन (Drone)
- अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV)
- पैराग्लाइडर
- बड़े गुब्बारे (Balloons)
प्रभावित मार्ग:
- पहलगाम रूट
- बालटाल रूट
- बीच के सभी पड़ाव और शिविर स्थल
सुरक्षा का मुख्य उद्देश्य
इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य किसी भी तरह के आतंकवादी खतरे या निगरानी गतिविधि से तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हाल ही में हुए पहलगाम हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सतर्क कर दिया है।
किस पर लागू नहीं होगा यह प्रतिबंध?
हालांकि यह प्रतिबंध व्यापक है, लेकिन कुछ आवश्यक सेवाओं के लिए अपवाद रखा गया है:
- मेडिकल इवैक्यूएशन (Medical Evacuation)
- डिजास्टर मैनेजमेंट ऑपरेशन्स (Disaster Relief)
- सिक्योरिटी फोर्सेज की निगरानी (Surveillance by Forces)
इन स्थितियों में एक विशेष एसओपी (Standard Operating Procedure) जारी की जाएगी, जिससे इन गतिविधियों को भी सुरक्षा नियमों के तहत संचालित किया जा सके।
अमरनाथ यात्रा 2025 की तिथि और अवधि
- यात्रा प्रारंभ: 3 जुलाई 2025
- यात्रा समाप्ति: 9 अगस्त 2025
- नो-फ्लाइंग जोन अवधि: 1 जुलाई से 10 अगस्त 2025
केंद्रीय बलों की तैनाती: CAPF का विशेष प्रबंध
580 कंपनियां तैनात होंगी
भारत सरकार द्वारा यात्रा के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 580 कंपनियां तैनात की जा रही हैं। इसमें शामिल होंगे:
- सीआरपीएफ (CRPF)
- बीएसएफ (BSF)
- आईटीबीपी (ITBP)
- एसएसबी (SSB)
- स्थानीय पुलिस बल
यात्रा मार्ग और शिविरों पर तगड़ा पहरा
- पहलगाम, बालटाल, पंजतरनी जैसे प्रमुख पड़ावों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है
- हाई-टेक नाइट विजन कैमरा, मेटल डिटेक्टर और बायोमेट्रिक सिस्टम का उपयोग
- चेकिंग प्वाइंट पर सीसीटीवी निगरानी
श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश
श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे:
- किसी भी तरह के ड्रोन या उड़ने वाले उपकरण साथ न लाएं
- सुरक्षा जांच में पूरा सहयोग करें
- पहचान पत्र और यात्रा पंजीकरण दस्तावेज हमेशा अपने पास रखें
- यात्रा मार्ग में किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत निकटतम सुरक्षाकर्मी को दें
नो-फ्लाइंग जोन से क्या लाभ होगा?
आतंकवादी गतिविधियों की रोकथाम
ड्रोन या UAV का इस्तेमाल कर आतंकी निगरानी या हमले की योजना बनाते हैं। नो-फ्लाइंग जोन से यह खतरा रोका जा सकता है।
निजी निगरानी और गोपनीयता का हनन रोकेगा
तीर्थस्थलों की तस्वीरें या वीडियो बनाकर उनका दुरुपयोग करने वालों पर भी यह रोक लगेगी।
आपात स्थिति में राहत कार्यों के लिए मार्ग स्पष्ट रहेगा
जब केवल अधिकृत सेवाओं को हवाई संचालन की अनुमति होगी, तो जरूरी कार्यों में बाधा नहीं आएगी।
अमरनाथ यात्रा 2025 को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने व्यापक कदम उठाए हैं। नो-फ्लाइंग जोन की घोषणा इस दिशा में एक बड़ी पहल है जो यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी बाहरी खतरा श्रद्धालुओं की आस्था और यात्रा में बाधा न डाले।
