“भारत राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस हर साल 23 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन उस ऐतिहासिक पल की याद दिलाता है, जब भारत ने 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक चंद्रयान-3 को उतारा था। इस उपलब्धि ने भारत को दुनिया का चौथा ऐसा देश बना दिया, जिसने चंद्रमा पर कदम रखा और दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने वाला पहला देश भी। यह दिन न केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी है।“
यात्रा की शुरुआत
भारत की अंतरिक्ष यात्रा 1960 के दशक में शुरू हुई। उस समय संसाधन सीमित थे, लेकिन वैज्ञानिकों की मेहनत और संकल्प ने भारत को इस क्षेत्र में नई पहचान दिलाई। पहले सैटेलाइट आर्यभट्ट से लेकर आज के अत्याधुनिक उपग्रहों तक, भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ रहा है।
इसरो की उपलब्धियां
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पिछले दशकों में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।
- मंगलयान मिशन ने भारत को मंगल ग्रह तक पहुंचाने वाला पहला एशियाई देश बनाया।
- चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 ने चंद्रमा पर भारत की स्थिति को मजबूत किया।
- अब गगनयान मिशन के जरिए भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
गगनयान मिशन और नई उम्मीदें
इसरो गगनयान मिशन पर तेजी से काम कर रहा है। इस मिशन का लक्ष्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजना है। दिसंबर 2025 तक गगनयान का पहला मानवरहित परीक्षण मिशन लॉन्च होने की उम्मीद है। इस मिशन में अर्ध-मानव रोबोट व्योममित्र का भी इस्तेमाल होगा।
गगनयान मिशन की मुख्य बातें
- पहला मानवरहित परीक्षण दिसंबर 2025 तक।
- अंतरिक्ष यात्री भारतीय वायुसेना से चुने गए।
- यह मिशन भारत को अमेरिका, रूस और चीन की श्रेणी में शामिल करेगा।
अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार और स्टार्टअप्स की भूमिका
भारत सरकार ने 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खोल दिया। इसके बाद देश में 300 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप्स सक्रिय हो गए हैं। ये कंपनियां रॉकेट निर्माण, सैटेलाइट तकनीक और डेटा सेवाओं में काम कर रही हैं।
इन-स्पेस की पहल
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) की स्थापना से निजी कंपनियों को इसरो की सुविधाओं का उपयोग करने का अवसर मिला। इसके जरिए कई सब-ऑर्बिटल फ्लाइट्स सफलतापूर्वक लॉन्च हुई हैं।
वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों का योगदान
भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने हमेशा चुनौतियों को अवसर में बदला है। हाल ही में भारतीय वायुसेना ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर मिशन पूरा करके इतिहास रच दिया। यह किसी भारतीय द्वारा किया गया पहला ऐसा मिशन है।
निसार सैटेलाइट और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
भारत और अमेरिका ने मिलकर नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) सैटेलाइट लॉन्च किया है। यह सैटेलाइट पृथ्वी के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी जानकारी प्रदान करेगा। यह मिशन भारत की वैश्विक साझेदारी को भी मजबूत बनाता है।
खास कार्यक्रम
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2025 के अवसर पर पूरे देश में जागरूकता कार्यक्रम, प्रदर्शनी और छात्रों के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रेरित करना है।
