“बिहार में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत अब तक 5.22 करोड़ मतदाताओं के फॉर्म एकत्र किए जा चुके हैं, जो कि 66.16 प्रतिशत है। यह जानकारी निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के एक अधिकारी ने गुरुवार को दी। इस पुनरीक्षण कार्य की शुरुआत 24 जून 2025 को हुई थी और अब तक 7.89 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 5.22 करोड़ के एन्युमरेशन फॉर्म जमा हो चुके हैं।“
आयोग के मुताबिक, फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 25 जुलाई है और मौजूदा रफ्तार को देखते हुए यह कार्य समय से पहले पूरा होने की संभावना है। यह पुनरीक्षण बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण है और यह राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सशक्त बनाने के प्रयास का हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश और निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया
गुरुवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही, बिहार में प्रस्तावित चुनावों की तैयारी के तहत यह प्रक्रिया जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से वोटर सत्यापन के लिए आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को स्वीकार करने पर विचार करने का सुझाव दिया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और जॉयमाल्य बागची शामिल थे, उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें यह दावा किया गया था कि 26 जून को आयोग द्वारा लिया गया एसआईआर का निर्णय लाखों मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर सकता है और इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
अदालत ने कहा कि संशोधित प्रारूप मतदाता सूची अगस्त 2025 में प्रकाशित की जाएगी और इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई 2025 को होगी।
मतदाता सूची में सुधार का उद्देश्य और प्रक्रिया
विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को ठीक करना, नए मतदाताओं का पंजीकरण और दुर्घटनावश अनुपस्थित या मृत मतदाताओं के नामों को हटाना है। यह प्रक्रिया राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है, ताकि हर नागरिक का सही और पारदर्शी तरीके से मतदान हो सके।
इस प्रक्रिया के अंतर्गत, प्रत्येक मतदाता का सत्यापन किया जा रहा है और सूची में हर बदलाव का न्यायसंगत आधार दिया जा रहा है। इसके अलावा, मतदाताओं के लिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उनकी जानकारी सही तरीके से अपडेट की जाए और भविष्य में कोई भी मतदाता गलत सूचीबद्ध न हो।
एसआईआर प्रक्रिया में भागीदार की भूमिका और सहायता
इस पुनरीक्षण कार्य में 77,895 बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) और 4 लाख से अधिक स्वयंसेवक सक्रिय रूप से शामिल हैं। ये अधिकारी विशेष रूप से बुजुर्गों, विकलांगों, बीमार और कमजोर वर्गों को सहायता प्रदान कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 1.56 लाख बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) भी इस प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं, जिन्हें सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त किया गया है।
इस तरह, निर्वाचन आयोग सभी वर्गों को यह सुनिश्चित करने के लिए मदद कर रहा है कि हर वोटर का सही पंजीकरण हो और कोई भी नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न हो।
आधिकारिक आंकड़े और आगामी कदम
वर्तमान में, निर्वाचन आयोग ने बताया कि पिछले 16 दिनों में 7.90 करोड़ फॉर्म छापे गए हैं और लगभग 98 प्रतिशत फॉर्म (7.71 करोड़) पहले ही मतदाताओं को वितरित किए जा चुके हैं। इस प्रक्रिया में सभी पंजीकृत मतदाताओं की स्मार्ट निगरानी की जा रही है, ताकि सभी मतदाता जानकारी सही और अद्यतन हो।
फॉर्मों का वितरण और जमा करने का कार्य तेजी से हो रहा है, और आयोग ने बताया है कि 25 जुलाई 2025 तक सभी फॉर्मों का संग्रहण पूरा कर लिया जाएगा, इसके बाद संशोधित मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित किया जाएगा।
बिहार के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत, निर्वाचन आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि वोटर डेटा सही, अद्यतन और निष्पक्ष तरीके से प्रोसेस किया जाए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों और निर्वाचन आयोग की दूरदर्शी पहल ने इस प्रक्रिया को सही दिशा में आगे बढ़ाया है।
