“स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में एक अहम जानकारी साझा की है कि अब तक 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र की 10.18 करोड़ महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर जांच पूरी की जा चुकी है। यह सफलता राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (AAMs) के माध्यम से प्राप्त की गई है।“
क्या है सर्वाइकल कैंसर जांच का उद्देश्य?
भारत में गैर-संचारी रोगों (NCDs) की समय पर पहचान, रोकथाम और प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए 30-65 वर्ष की महिलाओं को लक्षित कर यह अभियान चलाया जा रहा है। जांच के लिए मुख्य रूप से “VIA तकनीक” (Visual Inspection with Acetic Acid) का उपयोग किया जाता है, जो कि एक किफायती और प्रभावी तरीका है।
जांच की प्रक्रिया:
- प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा सब-हेल्थ सेंटर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में की जाती है।
- VIA पॉजिटिव पाए गए मामलों को उच्च चिकित्सा केंद्रों पर रेफर किया जाता है।
- जांच में आशा कार्यकर्ता अहम भूमिका निभाती हैं।
आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका
ग्रामीण भारत में आशा कार्यकर्ता इस जांच अभियान की रीढ़ की हड्डी हैं। वे घर-घर जाकर CBAC (Community Based Assessment Checklist) के ज़रिए जोखिम वाले लोगों की पहचान करती हैं और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित जांच के लिए प्रेरित करती हैं।
आंकड़ों में भारत की उपलब्धि
- पात्र महिलाएं: 25.42 करोड़ (30 से 65 वर्ष की आयु वर्ग)
- अब तक जांच की गई महिलाएं: 10.18 करोड़
- जांच अवधि: मिशन की शुरुआत से 20 जुलाई, 2025 तक
- त्वरित जांच अभियान: 20 फरवरी – 31 मार्च, 2025 तक विशेष अभियान चलाया गया
यह आंकड़ा राष्ट्रीय एनसीडी पोर्टल पर भी दर्ज है और यह सरकार की रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवा रणनीति की सफलता को दर्शाता है।
जागरूकता अभियान और संचार गतिविधियां
महिलाओं में कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस और विश्व कैंसर दिवस जैसे मौकों पर प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता है।
राज्यों को मिलता है विशेष फंड:
- राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके Programme Implementation Plans (PIPs) के तहत NHM द्वारा फंडिंग प्रदान की जाती है, जिससे वे स्थानीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम संचालित कर सकें।
क्यों ज़रूरी है समय पर सर्वाइकल कैंसर जांच?
सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में पाया जाने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। यह आमतौर पर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) संक्रमण के कारण होता है, जो कि समय रहते जांच से पहचाना और रोका जा सकता है।
समय पर जांच से मिलते हैं ये लाभ:
- रोग का प्रारंभिक स्तर पर पता
- सस्ता और प्रभावी इलाज
- मृत्यु दर में कमी
- महिलाओं में स्वास्थ्य जागरूकता में वृद्धि
सरकार का लक्ष्य और भविष्य की योजना
स्वास्थ्य मंत्रालय का लक्ष्य है कि 2026 तक देश की सभी पात्र महिलाओं की जांच की जा सके। इसके लिए सरकार ने आयुष्मान भारत 2.0 और NCD स्ट्रैटेजी के तहत विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।
सर्वाइकल कैंसर जांच भारत में महिला स्वास्थ्य सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी प्रयास है। यह पहल न सिर्फ बीमारी की रोकथाम, बल्कि ग्रामीण महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने, रोजगार सृजन और सुलभ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही है।
