Delimitation Bill DMK NCP: प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) विधेयक को लेकर देश की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। DMK और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के रुख में नरमी के संकेत मिलने के बाद केंद्र की NDA सरकार को संसद में इस विधेयक के लिए आवश्यक समर्थन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

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सूत्रों के अनुसार, DMK ने स्पष्ट किया है कि वह विधेयक का अंतिम मसौदा देखने के बाद ही अपना अंतिम निर्णय लेगी। पार्टी का कहना है कि यदि तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, तो वह विधेयक पर सकारात्मक विचार कर सकती है।

वहीं, NCP (शरद पवार) की ओर से भी संकेत मिले हैं कि यदि परिसीमन प्रक्रिया में सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाता है और लोकसभा सीटों में संतुलित वृद्धि का प्रावधान होता है, तो पार्टी विधेयक का समर्थन करने पर विचार कर सकती है। हालांकि पार्टी ने अभी तक आधिकारिक रूप से अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि DMK और NCP (शरद पवार) का समर्थन या तटस्थ रुख NDA को मिलता है, तो संसद में इस संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने की सरकार की स्थिति मजबूत हो सकती है। वहीं विपक्षी दलों के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं।

परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों का पुनर्निर्धारण करना है। दक्षिणी राज्यों की चिंता यह रही है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद कहीं उनकी संसदीय प्रतिनिधित्व क्षमता प्रभावित न हो। इसी कारण यह मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।

अब सभी की नजरें संसद के आगामी सत्र और सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले अंतिम विधेयक पर टिकी हैं, जिसके बाद विभिन्न दल अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करेंगे।

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