“झारखंड के देवघर जिले में आज मंगलवार को एक भीषण सड़क हादसे ने श्रावणी मेले की श्रद्धा को हिला कर रख दिया। यह हादसा देवघर के मोहनपुर ब्लॉक के जमुनिया गांव के पास हुआ, जहां कांवड़ियों से भरी एक बस और गैस सिलेंडर लदे ट्रक की सीधी टक्कर हो गई।“
हादसे में 35 से ज्यादा कांवड़िये घायल, कई की हालत गंभीर
हादसे के समय बस में लगभग 35 कांवड़िये सवार थे, जो बाबा बैद्यनाथ धाम में जल चढ़ाने के लिए जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस के परखच्चे उड़ गए और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।
कई यात्री बस के अंदर ही फंसे रह गए जिन्हें निकालने के लिए पुलिस, एंबुलेंस और NDRF की टीमें मौके पर पहुंची। क्रेन और गैस कटर की मदद से बचाव कार्य किया गया।
राहत कार्य में जुटा जिला प्रशासन
घायलों को तत्काल नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और देवघर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां पर कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
जिला प्रशासन ने तेजी से प्रतिक्रिया देते हुए सीनियर अफसरों को मौके पर भेजा और अस्पताल में भी इलाज की निगरानी की जा रही है।
क्या ड्राइवर की लापरवाही हादसे की वजह? जांच शुरू
प्रशासन ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है और संभावना जताई जा रही है कि हादसा तेज रफ्तार या चालक की लापरवाही के कारण हुआ हो सकता है। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
श्रावणी मेले में उमड़ती है लाखों श्रद्धालुओं की भीड़
यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब झारखंड के देवघर में श्रावणी मेला अपने चरम पर है और लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम में जल अर्पित करने के लिए पहुंचते हैं। कांवड़ियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और परिवहन को लेकर प्रशासन पहले से ही सतर्क रहता है, लेकिन यह हादसा व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़ा करता है।
घटनास्थल पर अफरा-तफरी, स्थानीय लोगों ने किया सहयोग
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि टक्कर होते ही पूरी बस झटके से पलट गई, जिससे कई लोग अंदर दब गए। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य में हाथ बंटाया, और पुलिस आने से पहले ही कई घायलों को बाहर निकालने में मदद की।
राज्य सरकार से मिल सकती है सहायता राशि
संभावना है कि राज्य सरकार जल्द ही आर्थिक सहायता की घोषणा करेगी। आमतौर पर ऐसी दुर्घटनाओं में मृतकों के परिजनों और घायलों को मुआवजा और इलाज की पूरी लागत राज्य सरकार उठाती है।
एनडीआरएफ की सक्रियता से बचा बड़ा नुकसान
एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की समय पर मौजूदगी और क्रेन-गैस कटर के इस्तेमाल ने यह सुनिश्चित किया कि घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके, जिससे कई की जान बच सकी।
श्रावणी मेले जैसे धार्मिक आयोजनों में जहां भक्ति का सैलाब उमड़ता है, वहीं यातायात सुरक्षा और ड्राइवरों की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।
इस हादसे ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि धार्मिक उत्सवों के दौरान सुरक्षा मानकों की कड़ाई से पालना होनी चाहिए।
