हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप वह स्थिति होती है जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव सामान्य से ज्यादा बना रहता है।
इसका पता अक्सर तब चलता है जब यह शरीर को नुकसान पहुंचा चुका होता है – इसलिए इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है।

कब होता है ब्लड प्रेशर हाई?

सिस्टोलिक BP ≥ 140 mmHg
डायस्टोलिक BP ≥ 90 mmHg

यदि किसी व्यक्ति का रक्तचाप बार-बार इस सीमा से ऊपर जाता है, तो वह हाइपरटेंशन का मरीज माना जाता है।

हाइपरटेंशन के लक्षण (Symptoms of Hypertension)

हाइपरटेंशन अक्सर बिना लक्षण के होता है, लेकिन कुछ संकेत निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • सिर में तेज दर्द
  • चक्कर आना
  • छाती में दबाव या दर्द
  • सांस लेने में दिक्कत
  • घबराहट और बेचैनी
  • नाक से खून आना
  • अनियमित दिल की धड़कन

इनमें से कोई भी लक्षण लगातार महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

हाइपरटेंशन के मुख्य कारण (Main Causes)

1. गलत जीवनशैली

  • नींद की कमी
  • अत्यधिक तनाव
  • धूम्रपान और शराब
  • जंक फूड, अधिक नमक व तेल
  • रात में जागना और दिन में सोना

2. पारिवारिक इतिहास

  • यदि माता-पिता को उच्च रक्तचाप है, तो खतरा दोगुना

3. अन्य कारण

  • मोटापा
  • निष्क्रिय जीवन
  • कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट
  • मधुमेह या कोलेस्ट्रॉल की समस्या

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से समाधान

CCRAS (Central Council for Research in Ayurvedic Sciences) के अनुसार हाइपरटेंशन को नियंत्रित करने के लिए ये उपाय कारगर हैं:

खानपान में बदलाव करें:

  • कम सोडियम वाला भोजन
  • ताजे फल और सब्जियों का सेवन
  • नारियल पानी और छाछ का सेवन
  • वसा रहित भोजन, ओट्स, लहसुन
  • हर्बल चाय, हल्दी, दालचीनी

योग और प्राणायाम करें:

  • भ्रामरी, अनुलोम-विलोम, शवासन
  • नियमित ध्यान (Meditation)
  • हल्की वॉक और फिजिकल एक्टिविटी

वजन नियंत्रित रखें:

  • मोटापा हाइपरटेंशन का बड़ा कारक है
  • हर दिन 30 मिनट व्यायाम करें

हाइपरटेंशन के लिए आयुर्वेदिक औषधियां

  • सर्पगंधा (Rauvolfia serpentina): ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने में उपयोगी
  • ब्राह्मी और शंखपुष्पी: मानसिक शांति और तनाव नियंत्रण
  • जटामांसी: नसों को शांत करती है
  • अर्जुन छाल: दिल की मांसपेशियों के लिए लाभकारी

इनका सेवन केवल आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से करें।

क्या न करें?

  • तनाव में भोजन न करें
  • मल-मूत्र रोकना हानिकारक
  • अत्यधिक नमक, चाय-कॉफी से दूरी
  • धूम्रपान और शराब बिल्कुल न लें
  • प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से बचें

30 की उम्र के बाद रेगुलर BP जांच क्यों जरूरी है?

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, धमनियों की लचीलापन कम होता है और ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।
इसलिए 30 की उम्र के बाद हर 6 महीने में बीपी की जांच कराना ज़रूरी है — खासकर यदि परिवार में हाई बीपी का इतिहास है।

हाइपरटेंशन कोई अचानक से होने वाली बीमारी नहीं है। यह धीरे-धीरे विकसित होती है और समय पर न पहचानी जाए तो दिल, किडनी और दिमाग को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है।

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