भारत में कर प्रणाली के सुधार के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयकर विधेयक 2025 को वापस लिया गया है और इसे अब संशोधित रूप में संसद में फिर से पेश किया जाएगा। यह कदम उस 31 सदस्यीय चयन समिति की सिफारिशों पर आधारित है, जो भा.ज.पा. सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता में गठित की गई थी।

इस लेख में हम जानेंगे कि आयकर विधेयक 2025 के संशोधन से भारत के आर्थिक विकास पर क्या असर पड़ेगा और इसके प्रमुख संशोधनों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

1. आयकर विधेयक 2025 का उद्देश्य:

आयकर विधेयक 2025 का उद्देश्य भारतीय कर प्रणाली को सरल, स्पष्ट, और आधुनिक बनाना था। 1961 के मौजूदा आयकर अधिनियम को आज की आर्थिक और कानूनी जरूरतों के अनुसार पुनः संरचित किया जा रहा था। इस विधेयक का उद्देश्य करदाताओं के लिए कर प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना था ताकि कोई भी भ्रांति या कानूनी विवाद उत्पन्न न हो।

विधेयक की प्रस्तुति के बाद 31 सदस्यीय चयन समिति ने इस पर समीक्षा की और 566 सुझाव दिए, जिनमें ड्राफ्ट में सुधार और हितधारकों के सुझाव शामिल थे।

2. प्रमुख सिफारिशें और सुधार:

आयकर विधेयक 2025 में किए गए संशोधन का मुख्य उद्देश्य करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को और अधिक स्पष्ट और सुलभ बनाना था। कुछ प्रमुख सिफारिशें जो चयन समिति ने की हैं, वे निम्नलिखित हैं:

i. आयकर रिटर्न में देरी पर रिफंड सुविधा:

एक प्रमुख सुझाव था कि यदि करदाता निर्धारित समय सीमा के बाद भी आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं, तो उन्हें रिफंड की सुविधा मिलनी चाहिए। इससे लाखों करदाताओं को राहत मिलेगी, जो समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करते हैं।

ii. MSME की परिभाषा में बदलाव:

चयन समिति ने सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSME) की परिभाषा को एमएसएमई अधिनियम के अनुरूप करने का सुझाव दिया है, ताकि इनके लिए कर नियम और सुविधाएँ स्पष्ट और सरल हों।

iii. दान के प्रावधानों की स्पष्टता:

समिति ने अज्ञात दान के प्रावधानों को स्पष्ट करने और “आय” और “रसीद” जैसे शब्दों के उपयोग में स्पष्टता लाने की सिफारिश की है। इससे दान की प्रक्रिया में कोई भ्रम नहीं रहेगा और पारदर्शिता बनी रहेगी।

iv. “डीम्ड एप्लीकेशन” की अवधारणा का हटाना:

समिति ने “डीम्ड एप्लीकेशन” की अवधारणा को हटाने का सुझाव दिया, जिससे करदाताओं के लिए यह प्रक्रिया और सरल हो जाएगी।

v. भविष्य निधि पर टीडीएस और अग्रिम निर्णय शुल्क में संशोधन:

समिति ने भविष्य निधि पर टीडीएस और अग्रिम निर्णय शुल्क के नियमों में संशोधन की सिफारिश की है, जिससे पारदर्शिता और सुगमता बनी रहेगी।

vi. दंडात्मक शक्तियों में स्पष्टता:

आयकर विभाग द्वारा दंडात्मक शक्तियों का उपयोग करने के संदर्भ में भी स्पष्टता लाने की सिफारिश की गई है।

3. आयकर विधेयक 2025 का वापसी और पुनः प्रस्तुति:

यह विधेयक मूल रूप से 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था, और इसे केंद्रीय बजट 2024 का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया था। इस विधेयक का लक्ष्य 1961 के आयकर अधिनियम का व्यापक पुनर्गठन करना था, ताकि यह कर प्रणाली सरल और प्रभावी हो सके।

हालांकि, विधेयक में कुछ बारीकियां और भ्रम पैदा करने वाली बातें थीं, जिसके कारण चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर इसे वापस लिया गया और अब इसे संशोधित रूप में संसद में फिर से पेश किया जाएगा।

4. पीएम मोदी की प्रतिक्रिया:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम कर सुधारों और आधुनिकization की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का संशोधित रूप भारत के कर प्रणाली को आधुनिक और विकसित देशों के स्तर पर ले जाएगा, जिससे व्यवसाय और करदाताओं दोनों को फायदा होगा।

5. विपक्ष का विरोध:

हालांकि, विपक्ष ने इस विधेयक को लेकर आपत्ति जताई थी, लेकिन सरकार ने इसे संशोधित करने और स्वीकार करने का निर्णय लिया। इस कदम से सरकार की पारदर्शिता और सुधार प्रक्रिया को दिखाया गया है।

आयकर विधेयक 2025 का वापस लेना और संशोधित रूप में फिर से प्रस्तुत किया जाना भारतीय कर प्रणाली को सरल और प्रभावी बनाने के लिए एक अच्छा कदम है। इससे करदाताओं को राहत मिलेगी और विधायी प्रक्रिया और सरकार की पारदर्शिता में सुधार होगा। यह कदम भारत के आर्थिक सुधारों और विकसित देशों के समान कर प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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