One Nation One Election 2029 : देश में लंबे समय से चर्चा में रहे ‘वन नेशन, वन इलेक्शन (ONOE)’ को लेकर चुनाव आयोग ने महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि यदि आवश्यक कानून संसद से 2028 तक पारित हो जाता है और आयोग को कम से कम छह महीने का अग्रिम समय दिया जाता है, तो वह 2029 से लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने के लिए तैयार है।

चुनाव आयोग के अनुसार, एक साथ चुनाव कराने के लिए पर्याप्त तैयारी, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM), वीवीपैट (VVPAT), मतदान कर्मियों, सुरक्षा बलों और लॉजिस्टिक व्यवस्था की पहले से योजना बनानी होगी। इसी कारण आयोग ने छह महीने की तैयारी अवधि को आवश्यक बताया है।

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‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का उद्देश्य पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक ही समय पर कराना है। सरकार का तर्क है कि इससे बार-बार होने वाले चुनावों पर होने वाला खर्च कम होगा, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास कार्यों पर चुनाव आचार संहिता का प्रभाव भी कम पड़ेगा।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए संविधान के कई प्रावधानों में संशोधन और संबंधित कानूनों में बदलाव की आवश्यकता होगी। इसलिए संसद द्वारा आवश्यक विधेयकों को पारित करना इस प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण शर्त मानी जा रही है।

इस प्रस्ताव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की राय अलग-अलग है। कुछ दल इसे चुनावी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने वाला कदम मानते हैं, जबकि कुछ विपक्षी दलों का कहना है कि इससे संघीय ढांचे और राज्यों की स्वायत्तता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में इस विषय पर व्यापक राजनीतिक सहमति भी महत्वपूर्ण होगी।

यदि संसद 2028 तक आवश्यक कानून पारित कर देती है और चुनाव आयोग को समय पर तैयारी का अवसर मिलता है, तो 2029 का आम चुनाव भारत के चुनावी इतिहास में एक बड़े बदलाव का गवाह बन सकता है। फिलहाल चुनाव आयोग ने केवल अपनी प्रशासनिक और परिचालन (Operational) तैयारी की बात कही है। अंतिम निर्णय संसद द्वारा कानून पारित होने और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगा।

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