India Indigenous Bullet Train : भारत ने हाई-स्पीड रेल परियोजना को गति देने के लिए बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। जापान द्वारा यह संकेत दिए जाने के बाद कि अगली पीढ़ी की E10 शिंकानसेन ट्रेन 2034 से पहले उपलब्ध नहीं हो सकेगी, भारत ने अब स्वदेशी बुलेट ट्रेन विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय मानक वाले ETCS (European Train Control System) सिग्नलिंग सिस्टम को अपनाने का निर्णय लिया है।
यह फैसला मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की समयसीमा को प्रभावित होने से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का लक्ष्य परियोजना के पहले चरण को तय समय के अनुसार शुरू करना है। इसके लिए शुरुआती परिचालन भारतीय तकनीक से विकसित हाई-स्पीड ट्रेनसेट के साथ किया जाएगा, जबकि जापान की E10 ट्रेनें भविष्य में उपलब्ध होने पर शामिल की जा सकती हैं।
रेल मंत्रालय के अनुसार, परियोजना में ETCS आधारित ओपन-स्टैंडर्ड सिग्नलिंग सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। यह प्रणाली यूरोप सहित कई देशों में उपयोग की जा रही है और भविष्य में विभिन्न प्रकार की हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन के लिए अधिक लचीलापन प्रदान करेगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस निर्णय का अर्थ भारत और जापान के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है। विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि दोनों देशों के बीच मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पर सहयोग जारी है और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
सूत्रों के अनुसार, भारत में विकसित की जा रही स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनें ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी मजबूती देंगी। इससे भविष्य की अन्य बुलेट ट्रेन परियोजनाओं में विदेशी निर्भरता कम होगी और घरेलू रेल निर्माण क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के दीर्घकालिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
