“भारत और ब्रिटेन के बीच हस्ताक्षरित द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के प्रभाव से भारत का चमड़ा और जूते का निर्यात 2024 के 49.4 करोड़ डॉलर से बढ़कर तीन वर्षों में 1 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दी है।“
सीमा शुल्क खत्म होने से मिलेगा बड़ा लाभ
मंत्री के अनुसार, भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) के तहत ब्रिटेन ने भारत से आने वाले वस्त्र, चमड़ा और जूते के उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क को समाप्त कर दिया है:
- चमड़े के सामान पर पहले 2% से 8% शुल्क था
- चमड़े के जूतों पर 4.5%
- गैर-चमड़े के जूतों पर 11.9% तक का शुल्क लगता था
इससे भारतीय उत्पाद अब प्रतिस्पर्धी देशों जैसे बांग्लादेश, कंबोडिया और वियतनाम के बराबरी पर आ जाएंगे, जिन्हें पहले से UK में टैरिफ-फ्री पहुंच मिल रही थी।
बढ़ेगा रोजगार, एमएसएमई और महिला उद्यमियों को मिलेगा बढ़ावा
पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि इस समझौते से देशभर के मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों को सीधा लाभ मिलेगा। विशेषकर:
- एमएसएमई क्षेत्र
- कारीगरों
- महिला उद्यमियों
- युवा नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स
इन क्षेत्रों में हजारों नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।
जीआई टैग वाले उत्पादों को मिलेगा संरक्षण और पहचान
इस समझौते के तहत, कोल्हापुरी चप्पलें, मोजरी जैसे भारतीय GI टैग उत्पादों को भी ब्रिटेन में कानूनी सुरक्षा और बाज़ार की पहचान मिलेगी। इससे भारतीय पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग और मूल्यवर्धन में सहायता मिलेगी।
सरकारी योजनाएं देंगी सपोर्ट
मंत्री ने बताया कि सरकार की मौजूदा योजनाएं इस समझौते का पूरा लाभ उठाने के लिए तैयार हैं:
- भारतीय फुटवियर और चमड़ा विकास कार्यक्रम (IFLDP) – ₹1,700 करोड़ का बजट
- केंद्रित उत्पाद प्रोत्साहन योजना
- डिजाइन स्टूडियो, मेगा क्लस्टर और टेक्नोलॉजी अपग्रेड जैसी योजनाएं
ये सभी योजनाएं भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता, डिज़ाइन और वैश्विक मार्केटिंग में सुधार के लिए बनाई गई हैं।
कपड़ा उद्योग को भी मिलेगा बड़ा फायदा
FTA के माध्यम से भारतीय वस्त्र उद्योग को भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी। इससे देश के प्रमुख कपड़ा क्लस्टर, जैसे:
- तिरुपुर
- जयपुर
- सूरत
- लुधियाना
- पानीपत
- भदोही
- मुरादाबाद
को नई ऊर्जा और बाजारों तक पहुंच मिलेगी।
यूके का बाजार: एक बड़ा अवसर
ब्रिटेन का चमड़ा और फुटवियर बाजार $8.7 अरब डॉलर का है। इस विशाल बाजार में भारतीय उत्पादों को कम शुल्क, GI टैग और गुणवत्ता सुधार के ज़रिए एक नया स्थान प्राप्त होगा।
निर्यातकों के साथ सीधा संवाद
यह घोषणा दिल्ली में निर्यातकों के साथ हुई एक बैठक में की गई, जहां विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह बैठक CETA से जुड़े अवसरों और योजनाओं पर संवाद के लिए आयोजित की गई थी।
भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता सिर्फ एक आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि यह भारत के निर्माण और निर्यात क्षेत्र की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने वाला रणनीतिक कदम है।
चमड़ा, जूते और वस्त्र जैसे क्षेत्रों में यह FTA रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि और ‘ब्रांड इंडिया’ की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
