विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से टेलीफोन पर बात की। इस बातचीत में उन्होंने जयशंकर अराघची बातचीत के दौरान ईरान की भूमिका की सराहना की और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में सहयोग देने के लिए ईरान का धन्यवाद किया।

पश्चिम एशियाई तनाव के बीच ऑपरेशन सिंधु की महत्ता

पश्चिम एशिया में इजरायल-हमास संघर्ष ने हाल के महीनों में क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाई है। इस परिस्थिति में जयशंकर अराघची बातचीत का उद्देश्य भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना था। भारत ने इस संकट के दौरान अपनी सुरक्षा रणनीति के तहत ‘ऑपरेशन सिंधु’ को एयरलिफ्ट और कूटनीतिक प्रयासों से सफल बनाया है।

भारत-ईरान कूटनीतिक साझेदारी: पुरानी दोستی को नया आयाम

भारत और ईरान के बीच हमेशा से मजबूत सामरिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। इस बार जयशंकर अराघची बातचीत ने इन रिश्तों को और मजबूत किया। दोनों मंत्रियों ने विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार साझा किया। यह संकेत है कि भारत क्षेत्र में पक्षों से खुला संवाद करके शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना चाहता है।

निकासी अभियान में ईरान का अहम योगदान

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि ईरान ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने जयशंकर अराघची बातचीत में इसे सराहनीय बताया और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। यह दोनों देशों के बीच ज़रूरी विश्वास और साझा प्रतिबद्धता की दिशा में एक कदम है।

24×7 सहायता: भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास तत्पर

भारत के विदेश मंत्रालय ने सुनिश्चित किया है कि संकटग्रस्त क्षेत्रों में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास 24 घंटे काम कर रहे हैं। वहाँ फंसे भारतीय नागरिक हमेशा मदद प्राप्त कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय ने बार-बार यात्रियों से इन मिशनों के तहत सावधानी और सलाह का पालन करने का आग्रह किया है।

कूटनीति का संतुलन: भारत की रणनीति क्या है?

भारत की विदेश नीति का प्रमुख उद्देश्य है:

  1. आपातकाल व नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  2. ईरान जैसे सहयोगी देशों के साथ मित्रता बनाए रखना।
  3. विरोधी राष्ट्रों पर दबाव बढ़ाए बिना मध्यस्थ भूमिका निभाना।

जयशंकर अराघची बातचीत ने इस रणनीति को प्रभावित रूप से सम्पन्न किया।

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