केंद्र सरकार ने लद्दाख को लेकर बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। अब लद्दाख को नागालैंड, सिक्किम और मिजोरम की तर्ज पर विशेष लोकतांत्रिक अधिकार और संवैधानिक सुरक्षा मिल सकती है। गृह मंत्रालय की हालिया बैठक में इस विषय पर महत्वपूर्ण सहमति बनी। हालांकि फिलहाल लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा, लेकिन चुने गए प्रतिनिधियों को विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां देने की तैयारी की जा रही है। बैठक में यह भी तय किया गया कि लद्दाख के लिए विशेष लेजिस्लेटिव बॉडी बनाई जा सकती है। इस व्यवस्था से स्थानीय लोगों की भागीदारी प्रशासन में बढ़ेगी। बैठक में पर्यावरणविद् Sonam Wangchuk भी शामिल हुए। उन्होंने लंबे समय से लद्दाख संवैधानिक सुरक्षा की मांग उठाई है।
सरकार का मानना है कि लद्दाख की सांस्कृतिक पहचान और भौगोलिक परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए वहां विशेष संवैधानिक संरक्षण जरूरी है। वहीं, लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने छठी अनुसूची और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग दोहराई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मॉडल भविष्य में राज्य के दर्जे की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में गृह मंत्रालय और लद्दाख संगठनों के बीच फिर बैठक होने की संभावना है।
FAQ
प्रश्न 1: लद्दाख को कौन से विशेष अधिकार मिल सकते हैं?
लद्दाख को अनुच्छेद 371A, 371F और 371G जैसी संवैधानिक सुरक्षा मिल सकती है।
प्रश्न 2: क्या लद्दाख को राज्य का दर्जा मिलेगा?
फिलहाल केंद्र सरकार ने राज्य का दर्जा देने से इनकार किया है।
प्रश्न 3: लद्दाख संवैधानिक सुरक्षा क्यों जरूरी है?
स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह जरूरी माना जा रहा है।
Durgesh Sharma | Suryoday Samachar

