“भारत की सांस्कृतिक धरोहर में एक और महत्वपूर्ण नाम जुड़ गया है। यूनेस्को ने मराठा मिलिट्री लैंडस्केप को अपनी विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया है। यह सूची भारत के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि इसमें 12 ऐतिहासिक किलों को स्थान दिया गया है, जिनमें से 11 किले महाराष्ट्र में और 1 किला तमिलनाडु में स्थित है।“
यह किले मराठा साम्राज्य के महत्व और उनके सैन्य शौर्य का प्रतीक हैं, जो आज भी भारतीय इतिहास और संस्कृति में अहम स्थान रखते हैं। यह भारतीय संस्कृति और सामरिक इतिहास को संजोने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री मोदी का बयान: गर्व का क्षण
इस अवसर पर एक्स पोस्ट के माध्यम से प्रतिक्रिया दी और कहा, “यह सम्मान हर भारतीय के लिए गर्व का पल है। इन किलों में से 12 भव्य किले हैं, जिनमें से 11 किले महाराष्ट्र में और 1 किला तमिलनाडु में है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “जब हम गौरवशाली मराठा साम्राज्य की बात करते हैं, तो हम इसे सुशासन, सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक कल्याण के साथ जोड़ते हैं। महान शासक किसी भी अन्याय के आगे न झुकने के अपने साहस से हमें प्रेरित करते हैं। मैं सभी से इन किलों को देखने और मराठा साम्राज्य के समृद्ध इतिहास के बारे में जानने का आह्वान करता हूं।”
इसके साथ ही, पीएम मोदी ने एक अन्य पोस्ट में रायगढ़ किले की अपनी यात्रा की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “ये 2014 में रायगढ़ किले की मेरी यात्रा की तस्वीरें हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज को नमन करने का अवसर मिला था। उस यात्रा को मैं हमेशा संजो कर रखूंगा।”
किलों का ऐतिहासिक महत्व
मराठा मिलिट्री लैंडस्केप में कुल 12 किलों को शामिल किया गया है, जो 17वीं से 19वीं सदी के बीच निर्मित हुए थे। इन किलों का महत्व न केवल सैन्य रणनीति और स्थापत्य कला में है, बल्कि ये पर्यावरण और वास्तुकला के साथ एक सामंजस्यपूर्ण संतुलन भी प्रस्तुत करते हैं।
इन किलों में प्रमुख नाम शामिल हैं:
- रायगढ़ किला
- शिवनेरी किला
- तोरण किला
- लोहगढ़ किला
- साल्हेर किला
यह किले मराठा साम्राज्य के शौर्य और साहस की गवाही देते हैं, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के नेतृत्व में दुनिया भर में प्रसिद्ध हुए। इन किलों ने न केवल सैन्य गतिविधियों का संचालन किया, बल्कि मराठा साम्राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास में भी अहम भूमिका निभाई।
गजेंद्र सिंह शेखावत का बयान
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, “यह सम्मान भारत की प्राचीन सभ्यता और मराठा साम्राज्य की वास्तुकला की उत्कृष्टता को उजागर करता है।” उन्होंने यह भी कहा कि इन किलों का संरक्षण और प्रचार आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने संस्कृति मंत्री के रूप में गजेंद्र सिंह शेखावत का जिक्र करते हुए कहा, “इसे संभव बनाने के लिए आपके सभी प्रयासों और समर्थन के लिए धन्यवाद।” यह बयान इस बात को स्पष्ट करता है कि यह सम्मान भारत की संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रमोट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
टूरिज्म और महाराष्ट्र के लिए संभावनाएं
इस ऐतिहासिक उपलब्धि से महाराष्ट्र और भारत में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से इन किलों को वैश्विक पहचान मिलेगी, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन उद्योग में भी सुधार होने की संभावना है।
इतिहास और संघर्ष
मराठा साम्राज्य भारतीय इतिहास का एक अहम हिस्सा है, जिसे न केवल सैन्य शक्ति के लिए, बल्कि सामाजिक सुधारों और गौरवपूर्ण शासन के लिए भी जाना जाता है। मराठों ने भारत के विभिन्न हिस्सों में अपनी सैन्य शक्ति और राजनीतिक प्रभाव से ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ मजबूत प्रतिरोध किया।
इन किलों ने मराठा साम्राज्य के साहस और संघर्ष को एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है। ये किले राजनीतिक सत्ता और रणनीतिक बल के स्थलों के साथ-साथ समाज में सामंजस्य और विकास के प्रतीक भी हैं।
‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप’ का यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल होना भारत के इतिहास और संस्कृति के लिए गर्व का क्षण है। यह कदम मराठा साम्राज्य के शौर्य और स्थापत्य की समृद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसके जरिए भारत के इतिहास को सहेजने और लोकप्रिय बनाने का कार्य किया जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनमोल धरोहर होगा।
