मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष की अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने की मांग को अस्वीकार किया। यह फैसला हिंदू पक्ष के लिए निराशाजनक था, क्योंकि वे इस मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने की मांग कर रहे थे।

हिंदू पक्ष की अर्जी और कोर्ट का फैसला

सूट नंबर 13 में वादी वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने शाही मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने के लिए एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। वादी ने कोर्ट से यह अनुरोध किया था कि इस मामले की आगामी सुनवाई में शाही ईदगाह मस्जिद को ‘विवादित ढांचा’ शब्द के रूप में संदर्भित किया जाए। हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई और कोर्ट ने हिंदू पक्ष की अर्जी को खारिज कर दिया।

मुस्लिम पक्ष को मिली राहत

हाई कोर्ट का यह निर्णय मुस्लिम पक्ष के लिए एक बड़ी राहत साबित हुआ, क्योंकि इससे शाही मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने की संभावनाओं पर रोक लग गई। अब हिंदू पक्ष की 18 याचिकाओं पर सुनवाई जारी है, जिनमें श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद और उसके आसपास के जमीन के मालिकाना हक को लेकर कई मुद्दे उठाए गए हैं। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की सिंगल बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।

हिंदू पक्ष की सुप्रीम कोर्ट में अपील

हालांकि, कोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका खारिज कर दी, लेकिन वकील महेंद्र प्रताप सिंह, जो श्री कृष्ण जन्मभूमि के पक्षकार हैं, ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि वह हाई कोर्ट के डिटेल्ड आदेश को पढ़ेंगे और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद

यह विवाद मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह मस्जिद के बीच चल रहा है, जो मुख्य रूप से जमीन के मालिकाना हक को लेकर है। श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के पास 11 एकड़ भूमि है, जबकि 2.37 एकड़ पर शाही ईदगाह मस्जिद बनी हुई है। इस भूमि को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद जारी है और अदालत में विभिन्न मामलों पर सुनवाई चल रही है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह निर्णय शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने की प्रक्रिया को रोकता है, लेकिन यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच सकता है। हिंदू पक्ष की याचिकाओं की सुनवाई जारी रहेगी और इस विवाद का समाधान आने वाले समय में कोर्ट के फैसले से संभव हो सकता है।

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