Durgesh Sharma | Suryoday Samachar पिछले कुछ वर्षों से पाकिस्तान आंतरिक सुरक्षा संकट लगातार गहराता जा रहा है। देश के कई इलाकों में बढ़ती हिंसा, आतंकी हमले और राजनीतिक अस्थिरता ने सरकार और सेना दोनों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, 2025 में उग्रवादी घटनाओं में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में लगातार हमले हो रहे हैं, जिससे स्थानीय आबादी में डर और असंतोष बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान आंतरिक सुरक्षा संकट केवल सैन्य कार्रवाई से हल नहीं हो सकता।
पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर की रणनीति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि केवल ताकत के इस्तेमाल से समस्या और जटिल हो गई है। राजनीतिक संवाद की कमी और स्थानीय समुदायों से दूरी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। इसके अलावा, अफगानिस्तान के साथ बिगड़ते संबंध भी इस संकट को बढ़ा रहे हैं। सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण न होना पाकिस्तान आंतरिक सुरक्षा संकट को और गंभीर बना रहा है। जानकारों के अनुसार, जब तक सैन्य दबाव के साथ-साथ राजनीतिक समाधान और क्षेत्रीय सहयोग नहीं होगा, तब तक हालात सुधरने की उम्मीद कम है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. पाकिस्तान आंतरिक सुरक्षा संकट क्या है?
यह वह स्थिति है जब देश के भीतर आतंकी हिंसा, विद्रोह और अस्थिरता बढ़ जाती है।
Q2. किन इलाकों में हालात सबसे खराब हैं?
खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है।
Q3. क्या केवल सेना से समाधान संभव है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि राजनीतिक संवाद और सामाजिक समाधान भी जरूरी हैं।

