भारत 14 अगस्त को हर साल ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाता है। 1947 में हुए विभाजन ने लाखों भारतीयों के जीवन को बदल दिया — लाखों लोग विस्थापित हुए, हज़ारों ने अपनी जान गंवाई, और करोड़ों ने स्थायी मानसिक और भावनात्मक घाव झेले। यह दिवस उनके संघर्ष, बलिदान और पीड़ा को याद करने का प्रतीक है।

सीएम योगी आदित्यनाथ का बयान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दिन को एक ‘त्रासदी’ करार देते हुए कहा:

“14 अगस्त मात्र एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास की एक अमानवीय वेदना है। संकीर्ण मजहबी कट्टरता और नफरत की नीतियों ने भारत माता को बांटने का षड्यंत्र रचा, जिसकी परिणति दंगों और निर्दोषों की हत्याओं के रूप में सामने आई।”

उन्होंने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह पीड़ा हमारी स्मृति और सीख दोनों है, और हमें यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य की कोई पीढ़ी इसे फिर न झेले।

केशव प्रसाद मौर्य की श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा:

“विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस, भारत के इतिहास की सबसे हृदयविदारक त्रासदी की याद दिलाता है। यह दिन उन सभी बलिदानियों और विस्थापितों को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने अपना घर, परिजन और भविष्य तक खो दिया।”

सीएम पुष्कर सिंह धामी का संदेश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पोस्ट में लिखा:

“सांप्रदायिक विभाजन की रेखा ने असंख्य परिवारों को उजाड़कर देश की आत्मा को आहत किया। लाखों परिवार अपने घर, आजीविका और स्मृतियों से वंचित होकर विस्थापन की वेदना सहने को विवश हुए। यह केवल इतिहास नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय चेतना में अंकित एक शाश्वत पीड़ा है।”

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस सिर्फ अतीत को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह एक संकल्प भी है कि ऐसी त्रासदी दोबारा कभी न हो। यह दिवस पीढ़ियों को एकता, सद्भाव और राष्ट्र प्रेम का महत्व याद दिलाता है।

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