भारत के सबसे बड़े इस्पात उत्पादकों में से एक स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने दुबई में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि कार्यालय खोला। इस कार्यालय के उद्घाटन के साथ, कंपनी की वैश्विक उपस्थिति को मजबूती मिलेगी और यह कदम भारत के इस्पात उद्योग को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी द्वारा उद्घाटन

केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने इस कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर भारत के महावाणिज्यदूत सतीश कुमार सिवन, सेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अमरेंदु प्रकाश, एनएमडीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी, इस्पात मंत्रालय के संयुक्त सचिव वी.के. त्रिपाठी और सेल, इस्पात मंत्रालय, एनएमडीसी और मेकॉन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

दुबई कार्यालय का रणनीतिक महत्व

सेल का दुबई में उद्घाटन किया गया कार्यालय एक रणनीतिक केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जो इस्पात निर्यात को बढ़ावा देने और भारत-यूएई व्यापार संबंधों को मजबूत करने में मदद करेगा। दुबई की निवेशक-अनुकूल माहौल और मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (एमईएनए) क्षेत्र में प्रवेश के लिए इसकी भूमिका इसे एक आदर्श आधार बनाती है, जिससे कंपनी को उभरते बाजारों में विस्तार करने में मदद मिलेगी।

वैश्विक उपस्थिति और राष्ट्रीय उत्पादन लक्ष्य

यह कदम भारत के इस्पात उद्योग की वैश्विक उपस्थिति को बढ़ाने और 2030 तक 300 मिलियन टन के राष्ट्रीय इस्पात उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य के अनुरूप है। सेल का दुबई कार्यालय भारत के इस्पात उद्योग को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह भारत की निरंतर प्रगति का प्रतीक है।

सेल का मुनाफा और कारोबार में वृद्धि

वित्त वर्ष 2025 की जनवरी-मार्च तिमाही में, सेल का मुनाफा सालाना आधार पर 16.5 प्रतिशत बढ़कर 1,011 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इस दौरान सेल की परिचालन से आय भी बढ़कर 29,316 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही के 27,958 करोड़ रुपये से 4.9 प्रतिशत अधिक थी। इस अवधि में सेल की बिक्री मात्रा भी बढ़कर 5.33 मिलियन टन हो गई, जो पिछले वर्ष की चौथी तिमाही में 4.56 मिलियन टन थी।

दुबई में सेल के प्रतिनिधि कार्यालय का उद्घाटन कंपनी के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे न केवल कंपनी को वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि यह भारत के इस्पात उद्योग को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। इस कदम से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और बढ़ावा मिलेगा, जिससे भविष्य में और अधिक अवसर खुल सकते हैं।

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