भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंचा रहा है। वित्त वर्ष 2024 में किए गए हर पांच में से चार डिजिटल लेनदेन यूपीआई के माध्यम से हुए, जिससे इसकी हिस्सेदारी 84 प्रतिशत तक पहुंच गई।

फिनटेक कंसल्टिंग और एडवाइजरी फर्म ‘द डिजिटल फिफ्थ’ की रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई सिर्फ एक भुगतान प्रणाली नहीं बल्कि भारत के लिए एक संपूर्ण डिजिटल इकोसिस्टम बन चुका है

यूपीआई लेनदेन में तेजी से वृद्धि

2018 में कुल 375 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 17,221 करोड़ तक पहुंच गया
लेनदेन का कुल मूल्य 2018 में 5.86 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024 में 246.83 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ गया
2019 में भारत के डिजिटल भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत थी, जो 2024 में 83 प्रतिशत से अधिक हो गई
यह वृद्धि कार्ड और वॉलेट आधारित लेनदेन की तुलना में कहीं अधिक तेज रही है

यूपीआई व्यापारियों के बीच भी हुआ लोकप्रिय

देशभर में 3 करोड़ से अधिक व्यापारी (मर्चेंट्स) यूपीआई से जुड़े हुए हैं
मर्चेंट-टू-कस्टमर (M2C) लेनदेन की सालाना वृद्धि दर 67 प्रतिशत है, जो पीयर-टू-पीयर (P2P) लेनदेन से भी तेज है।
यह डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है, जिससे छोटे और बड़े व्यापारी लाभान्वित हो रहे हैं।

यूपीआई का भविष्य: 2030 तक तीन गुना वृद्धि का अनुमान

फिनटेक विशेषज्ञ समीर सिंह जैनी के अनुसार, यूपीआई हर महीने 16 अरब से अधिक लेनदेन संभाल रहा है और 2030 तक यह संख्या तीन गुना बढ़ने की संभावना है

इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना जरूरी है:

रियल-टाइम धोखाधड़ी का पता लगाने वाली तकनीक
क्लाउड-नेटिव टेक्नोलॉजी का उपयोग
मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों को लागू करना
डिजिटल पेमेंट सिस्टम को निर्बाध रूप से कार्यरत बनाए रखना

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