“हर साल 15 फरवरी को इंटरनेशनल चाइल्डहुड कैंसर डे (ICCD) मनाया जाता है, ताकि बच्चों में कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके और इस गंभीर बीमारी से बचाव के उपायों पर चर्चा हो सके। यह दिन कैंसर से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों को मानसिक, सामाजिक और चिकित्सा सहायता देने के लिए भी समर्पित है।“
दुनियाभर में हर साल 4 लाख से अधिक बच्चे कैंसर की चपेट में आते हैं, जिनमें से कई मामलों में देरी से पहचान और सही इलाज न मिलने के कारण मृत्यु हो जाती है।
बच्चों में कैंसर के मुख्य कारण
जेनेटिक बदलाव: कुछ बच्चों को कैंसर आनुवंशिक कारणों से हो सकता है।
रेडिएशन एक्सपोजर: गर्भावस्था के दौरान रेडिएशन के संपर्क में आना कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है।
अस्वस्थ आहार: पोषण की कमी और मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन इम्युनिटी को कमजोर कर सकता है।
वातावरण प्रदूषण: जहरीले रसायनों, धूम्रपान और प्रदूषण के कारण भी कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
वायरल संक्रमण: कुछ वायरस, जैसे एबस्टीन-बार वायरस और ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV), बच्चों में कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।
कैसे मां का दूध बच्चों को कैंसर से बचाने में मदद करता है?
मां का दूध बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित और पौष्टिक आहार होता है, जो उन्हें कई घातक बीमारियों से बचाने में मदद करता है। शोध बताते हैं कि मां के दूध में ऐसे एंटीबॉडी और पोषक तत्व होते हैं जो कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाव में सहायक होते हैं।
इम्युनिटी को मजबूत बनाता है
- मां का दूध नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाता है, जिससे शरीर कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में सक्षम होता है।
- इसमें मौजूद लैक्टोफेरिन, इम्युनोग्लोबुलिन और साइटोकिन्स शरीर की सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं।
स्टेम सेल का प्राकृतिक स्रोत
- मां के दूध में मजबूत स्टेम सेल होते हैं, जो शरीर में नई स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण में मदद करते हैं और कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकते हैं।
ओलिगोसेकेराइड्स कैंसर के खतरे को कम करते हैं
- मां के दूध में ओलिगोसेकेराइड्स (Oligosaccharides) नामक तत्व होता है, जो शरीर में कैंसर को बढ़ाने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करता है।
HAMLET (Human Alpha-lactalbumin Made Lethal to Tumor Cells)
- शोध से पता चला है कि मां के दूध में एक विशेष प्रोटीन HAMLET पाया जाता है, जो कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सहायक होता है।
बच्चों को मोटापा और डायबिटीज से बचाता है
- मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज भी कैंसर के मुख्य कारणों में से एक है। मां का दूध शिशु के चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को बेहतर करता है, जिससे बच्चों में मोटापे का खतरा कम हो जाता है।
लीवर और ब्लड कैंसर के खतरे को कम करता है
- अध्ययन बताते हैं कि जो बच्चे कम से कम 6 महीने तक मां का दूध पीते हैं, उनमें ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) और लिवर कैंसर होने की संभावना 20% तक कम हो जाती है।
बच्चों को कैंसर से बचाने के अन्य तरीके
जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड से बचें
- बच्चों को अधिक पैकेटबंद और तले-भुने खाद्य पदार्थ न दें, क्योंकि इनमें हानिकारक केमिकल होते हैं।
- प्राकृतिक आहार जैसे फल, सब्जियां और सूखे मेवे खिलाएं।
रासायनिक और प्रदूषित वातावरण से बचाव करें
- घर के आसपास सफाई रखें और बच्चों को अधिक धूल और धुएं के संपर्क में न आने दें।
- प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म खाना न परोसें, क्योंकि इससे हानिकारक केमिकल निकल सकते हैं।
टीकाकरण कराएं
- कुछ कैंसर वायरस के कारण होते हैं, जैसे एचपीवी (HPV) और हेपेटाइटिस बी, इसलिए समय पर इनका टीकाकरण करवाएं।
बच्चों को सक्रिय रखें
- बच्चों को खेलने-कूदने के लिए प्रोत्साहित करें, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी।
- रोजाना कम से कम 1 घंटे की फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है।
नियमित हेल्थ चेकअप कराएं
- किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से सलाह लें।
- शुरुआती चरण में कैंसर का पता चलने पर यह आसानी से ठीक किया जा सकता है।
मां का दूध एक अमृत के समान है, जो बच्चों को केवल पोषण ही नहीं बल्कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाने में मदद करता है। हर माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके नवजात शिशु को कम से कम 6 महीने तक मां का दूध जरूर मिले।
