दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने 2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए दाखिला प्रक्रिया का औपचारिक आगाज़ कर दिया है। कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में अपग्रेडेड एडमिशन पोर्टल लॉन्च किया और विभिन्न यूजी, पीजी, बी.टेक, एलएलबी, पीएचडी और ओपन लर्निंग कोर्सों के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी।

स्नातक दाखिले: CUET स्कोर के आधार पर

  • इस वर्ष डीयू के 69 कॉलेजों में 79 यूजी प्रोग्रामों के लिए कुल 71,624 सीटें उपलब्ध हैं।
  • CUET स्कोर के आधार पर दाखिला होगा।
  • बीएससी (ऑनर्स) कोर्सों के लिए अब न्यूनतम भाषा स्कोर की 30% शर्त हटा दी गई है।

स्नातकोत्तर में दो नए कोर्स

डीयू ने एमए हिंदी पत्रकारिता और एमए इन टूरिज्म मैनेजमेंट जैसे दो नए पीजी कोर्स शुरू किए हैं। जल्द ही अंग्रेज़ी विभाग में एमए जर्नलिज्म को भी जोड़ा जाएगा।

  • कुल 82 पीजी कोर्सों में 13,432 सीटें उपलब्ध हैं।
  • अब तक 53,609 छात्र पंजीकृत:
    • छात्राएं: 30,490
    • छात्र: 23,117
    • ट्रांसजेंडर: 2
  • एलएलबी सबसे लोकप्रिय कोर्स: 9,270 आवेदन
  • सिंगल गर्ल चाइल्ड कोटा के लिए 1,131 आवेदन
  • अनाथ कोटे के लिए 90 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

नया पोर्टल: ‘ऑटो-एक्सेप्ट’ फीचर

  • डीयू ने एडमिशन पोर्टल को ‘ऑटो-एक्सेप्ट’ मोड के साथ अपग्रेड किया है।
  • इससे सीट आवंटन की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी।
  • पोर्टल पर यूजी/पीजी दोनों कोर्सों के लिए आवेदन सुविधा उपलब्ध है।

बी.टेक कोर्सों में रुचि

  • डीयू के कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्सों के लिए अब तक 6,030 आवेदन
  • इनमें से 195 छात्राएं सिंगल गर्ल चाइल्ड कोटे से और 4 अनाथ छात्र हैं।

एसओएल: पहली बार CUET आधारित प्रवेश

  • स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) ने पीजी कोर्सों में इस बार CUET स्कोर के आधार पर दाखिला शुरू किया है।
  • खाली सीटें मेरिट के आधार पर भरी जाएंगी।
  • विशेष श्रेणी की छूट:
    • खेल कोटा
    • अनाथ बच्चे
    • ट्रांसजेंडर
    • दिव्यांग
    • आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग

महत्वपूर्ण तिथियां

  • प्रवेश सत्र की शुरुआत: 1 अगस्त 2025
  • पोर्टल पर पंजीकरण: अब चालू
  • CUET स्कोर जारी होते ही मेरिट लिस्टें जारी होंगी

डीयू एडमिशन 2025 में इस बार कई नई पहलें और कोर्स जोड़े गए हैं। इससे छात्रों को न केवल विविध विकल्प मिलेंगे, बल्कि सामाजिक समावेशन और तकनीकी पारदर्शिता के दृष्टिकोण से यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

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