गर्मी के मौसम में नवजात शिशुओं को लेकर माता-पिता को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस मौसम में बच्चों में डिहाइड्रेशन फीवर यानी तरल पदार्थ की कमी से होने वाला बुखार देखने को मिलता है, जो संक्रमण नहीं बल्कि शरीर में पानी और आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी के कारण होता है।
डिहाइड्रेशन फीवर क्या होता है?
डिहाइड्रेशन फीवर एक ऐसा बुखार है जो नवजात शिशुओं में शरीर में तरल (fluid) की कमी के कारण होता है। यह कोई वायरस या बैक्टीरिया जनित संक्रमण नहीं होता, बल्कि यह शरीर के तापमान को नियंत्रित न कर पाने के कारण होता है।
मुख्य कारण:
- गर्मी का मौसम
- पर्याप्त मात्रा में मां का दूध न मिलना
- उल्टी या दस्त के कारण तरल की अधिक हानि
- बहुत गर्म कपड़े पहनाना
- बार-बार पेशाब आना लेकिन तरल पदार्थ की पूर्ति न होना
नवजात में डिहाइड्रेशन फीवर के लक्षण
डिहाइड्रेशन फीवर के लक्षण संक्रमण जनित बुखार से थोड़े अलग होते हैं। इनमें शामिल हैं:
- शरीर का गर्म होना लेकिन पसीना न आना
- मूत्र का कम आना या बिलकुल न आना
- मूत्र का गाढ़ा और पीले रंग का होना
- मुँह और होंठों का सूखना
- आंखों का अंदर धंस जाना
- नवजात का चिड़चिड़ा या सुस्त रहना
- रोते समय आंसू न आना
- त्वचा खिंचने पर धीमी से सामान्य स्थिति में लौटना (Skin turgor test)
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि उपरोक्त लक्षण 6–8 घंटे से अधिक समय तक बने रहें या शिशु दूध पीने से इंकार करे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। देरी से नवजात को गंभीर डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे IV fluids की आवश्यकता पड़ सकती है।
नवजात को डिहाइड्रेशन फीवर से बचाने के उपाय
1. बार-बार स्तनपान कराएं
नवजात को हर 1.5–2 घंटे पर स्तनपान कराएं, खासकर गर्मी में। यह शरीर में तरल बनाए रखने का सबसे सुरक्षित तरीका है।
2. हल्के और सूती कपड़े पहनाएं
गर्मी के मौसम में शिशु को ज्यादा कपड़ों में लपेटने से बचें। हल्के और सांस लेने वाले कपड़े उपयोग करें।
3. कमरे का तापमान नियंत्रित रखें
शिशु को ठंडी छांव वाले, हवादार और साफ-सुथरे कमरे में रखें।
4. धूप से बचाएं
शिशु को सीधी धूप में ले जाने से बचें, खासकर दोपहर के समय।
5. मां का हाइड्रेशन भी जरूरी है
अगर शिशु मां का दूध पीता है, तो मां को खुद भी पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लेने चाहिए ताकि दूध की मात्रा बनी रहे।
क्या नवजात को पानी देना चाहिए?
नहीं, 6 महीने से कम उम्र के शिशुओं को केवल मां का दूध देना चाहिए। पानी देना उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि उनका पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता।
डिहाइड्रेशन फीवर और संक्रमण जनित फीवर में अंतर कैसे समझें?
| मापदंड | डिहाइड्रेशन फीवर | संक्रमण जनित फीवर |
|---|---|---|
| तापमान | हल्का से मध्यम | सामान्यतः 100.4°F से अधिक |
| अन्य लक्षण | शुष्क होंठ, कम पेशाब, सुस्ती | खांसी, छींक, दस्त, उल्टी |
| खाने-पीने में रुचि | भूख कम | कभी-कभी भूख बनी रहती है |
| प्रतिक्रिया | सुस्त या रोने में सुस्ती | कभी-कभी रोने में सामान्य |
नवजात में डिहाइड्रेशन फीवर को हल्के में नहीं लेना चाहिए। गर्मी के मौसम में विशेष देखभाल, समय पर स्तनपान और उचित पर्यावरण देना बेहद जरूरी है। यह बुखार संक्रमण नहीं, बल्कि शरीर में पानी की कमी का संकेत है, जिसे सही समय पर पहचान कर उचित देखभाल से आसानी से रोका जा सकता है।

