“उत्तर भारत की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं में से एक कांवड़ यात्रा 2025 इस बार 11 जुलाई से शुरू हो रही है। सावन के महीने में भगवान शिव के भक्त बड़ी संख्या में हरिद्वार, गंगोत्री और गौमुख जैसे स्थानों से गंगाजल लेकर अपने स्थानीय शिवालयों तक जाते हैं। इसे लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारें हर वर्ष विशेष इंतजाम करती हैं। इस बार भी तैयारियां जोरों पर हैं।“
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया हवाई सर्वेक्षण
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बिजनौर जिले में कांवड़ यात्रा मार्ग का हवाई सर्वेक्षण किया।
उन्होंने गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट से हेलीकॉप्टर के माध्यम से बिजनौर के कई हिस्सों का निरीक्षण किया, जहां से कांवड़ यात्रा गुजरती है।
इस दौरान सीएम योगी ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
- श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि हो
- यात्रा मार्ग पर शुद्ध पेयजल, शौचालय, विश्राम स्थल, और मेडिकल कैंप सुनिश्चित किए जाएं
- भीड़ नियंत्रण, यातायात संचालन, और आपातकालीन सेवा तैयार रहें
- धार्मिक भावना का सम्मान हर स्तर पर किया जाए
बिजनौर बना यात्रा तैयारी का प्रमुख केंद्र
बिजनौर ज़िला हर साल लाखों कांवड़ियों के आने-जाने का प्रमुख रूट है। इसे ध्यान में रखते हुए यहां पर:
- CCTV कैमरों की निगरानी,
- पुलिस बल की तैनाती,
- दूरी-दूरी पर सहायता शिविर,
- और प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है।
सीएम योगी का हवाई निरीक्षण इस बात का संकेत है कि इस बार की कांवड़ यात्रा को प्रशासनिक प्राथमिकता दी जा रही है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की समीक्षा बैठक
कांवड़ यात्रा में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड की भूमिका भी अहम होती है। हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य गंगा तटीय क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगाजल भरते हैं।
इसी को देखते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस व आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
बैठक के दौरान जिन बिंदुओं पर चर्चा हुई, वे थे:
- यात्रा मार्गों पर आपदा प्रबंधन की तैनाती
- फ्लड जोन की मैपिंग
- आपातकालीन हेल्पलाइन
- इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन (यूपी-उत्तराखंड)
- सड़क सुरक्षा और यातायात नियंत्रण
सुरक्षा और सुविधाओं का समन्वय – यूपी और उत्तराखंड में साझा योजना
दोनों राज्यों के प्रशासन मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि:
- किसी भी स्थान पर भीड़भाड़ न हो
- कांवड़ मार्गों को वाहनों से मुक्त रखा जाए
- ई-रिक्शा या छोटी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं
- भोजन व जलपूर्ति की व्यवस्था पूरी हो
- ड्रोन से निगरानी और आपात स्थिति में बचाव दल तैनात हों
धार्मिक श्रद्धा के साथ टेक्नोलॉजी का समावेश
कांवड़ यात्रा में अब तकनीकी नवाचार भी शामिल किए जा रहे हैं:
- GPS ट्रैकिंग से पंजीकृत कांवड़ दलों की निगरानी
- मोबाइल ऐप के माध्यम से कांवड़ियों को रूट, विश्राम स्थल और हेल्पलाइन की जानकारी
- डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड से सूचना प्रसारण
- RFID कार्ड से श्रद्धालुओं की पहचान
जन-भागीदारी और स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका
कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सहज बनाने में सरकार के साथ-साथ कई स्वयंसेवी संगठन भी जुड़े हुए हैं। वे:
- भोजन वितरण,
- मेडिकल सहायता,
- भक्ति संगीत कार्यक्रम,
- और सांस्कृतिक आयोजन कर श्रद्धालुओं की सेवा में लगे हैं।
महत्वपूर्ण मार्ग और ज़ोन चिन्हित
उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के लिए प्रमुख मार्ग:
- गाजियाबाद – मेरठ – बिजनौर – हरिद्वार मार्ग
- मुजफ्फरनगर – रुड़की – हरिद्वार मार्ग
- बरेली – मुरादाबाद – काशीपुर – हरिद्वार मार्ग
इन मार्गों को ‘ग्रीन कॉरिडोर’ घोषित किया गया है जहां आपातकालीन सेवाएं तेज़ी से पहुंच सकेंगी।
मेडिकल और आपातकालीन सेवाओं का प्रबंध
इस बार के कांवड़ यात्रा में:
- हर 5-10 किलोमीटर पर मेडिकल कैंप
- एम्बुलेंस तैनात
- 24×7 कंट्रोल रूम
- NDRF और SDRF टीमों की तैनाती
सुनिश्चित की जा रही है ताकि प्राकृतिक आपदा या स्वास्थ्य संकट में तत्पर कार्रवाई हो सके।
कांवड़ यात्रा 2025 को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारें पूरी तरह तैयार हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पुष्कर सिंह धामी दोनों ने स्पष्ट कर दिया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
यह यात्रा अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रशासनिक योजना, जन सेवा, और आस्था के आदर का उत्कृष्ट उदाहरण बनती जा रही है।
