केंद्र सरकार ने आपातकालीन उपयोग के लिए आवश्यक दवाओं और 37 एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाओं की अधिकतम कीमतों (सीलिंग प्राइस) को तय किया है। यह कदम राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) द्वारा लिया गया है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की सस्ती उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इस नई नीति के तहत दवाओं की कीमतों में सुधार किए गए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को किफायती और आवश्यक दवाएं मिल सकेंगी।

आइए जानते हैं कि कौन सी दवाएं इस नई मूल्य निर्धारण से प्रभावित हुईं और इसका स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या असर होगा।

1. केंद्र सरकार द्वारा दवाओं की कीमतें निर्धारित करने का उद्देश्य

सरकार का यह कदम आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने और उन्हें सस्ती और सुलभ बनाने के लिए है। महामारी के दौरान बढ़ी हुई दवाओं की कीमतें और स्वास्थ्य संकट ने सरकार को इस दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। एनपीपीए ने यह सुनिश्चित किया है कि आपातकालीन, संक्रमण, हृदय रोग, मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं उचित मूल्य पर उपलब्ध हों, ताकि गरीब और मंझले वर्ग के लोग इन दवाओं का इस्तेमाल कर सकें।

2. प्रमुख दवाओं की नई कीमतें

सरकार ने चार प्रमुख आपातकालीन दवाओं की कीमतें तय की हैं, जो विभिन्न रोगों के इलाज में उपयोगी हैं। इन दवाओं की कीमतों में कमी से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की संभावना है।

इप्राट्रोपियम (Ipratropium):

यह दवा क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के इलाज के लिए उपयोगी है। इसकी नई कीमत तय की गई है 2.96 रुपये/मिलीलीटर

सोडियम नाइट्रोप्रसाइड (Sodium Nitroprusside):

यह दवा उच्च रक्तचाप और हृदय विफलता के इलाज में सहायक है। इसकी कीमत 28.99 रुपये/मिलीलीटर तय की गई है।

डिल्टियाजेम (Diltiazem):

यह दवा उच्च रक्तचाप और सीने में दर्द के इलाज में प्रभावी है। इसकी कीमत 26.72 रुपये/कैप्सूल तय की गई है।

पोविडोन आयोडीन (Povidone Iodine):

यह दवा त्वचा कीटाणुशोधन और घावों की देखभाल के लिए उपयोगी है। इसकी कीमत 6.26 रुपये/ग्राम तय की गई है।

इन दवाओं के मूल्य निर्धारण से स्वास्थ्य सेवाएं किफायती हो जाएंगी और गरीबों और मंझले वर्ग के लोगों को इलाज में सहारा मिलेगा।

3. अन्य प्रभावित दवाएं

इसके अलावा, एनपीपीए ने और भी महत्वपूर्ण दवाओं की कीमतें कम की हैं, जैसे:

  • पैरासिटामोल (Paracetamol)
  • एटोरवास्टेटिन (Atorvastatin)
  • एमोक्सिसिलिन (Amoxicillin)
  • मेटफॉर्मिन (Metformin)
  • एसिक्लोफेनाक (Aceclofenac)
  • पैरासिटामोल-ट्रिप्सिन काइमोट्रिप्सिन मिश्रण (Paracetamol-Trypsin Chymotrypsin)
  • एटोरवास्टेटिन-क्लोपिडोग्रेल संयोजन (Atorvastatin-Clopidogrel Combination)

इन दवाओं के मूल्य कम होने से विभिन्न सांविधिक और निरोधात्मक बीमारियों के उपचार में सुलभता आएगी।

4. एनपीपीए के दिशानिर्देश और नियम

एनपीपीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन दवाओं का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) सीलिंग प्राइस से कम है, वे मौजूदा एमआरपी पर ही बिकेंगी। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं की कीमतें सीलिंग प्राइस से अधिक नहीं हो सकतीं

इसके अलावा, नई कीमतें जीएसटी-मुक्त होंगी, हालांकि अतिरिक्त शुल्क की आवश्यकता पड़ने पर प्रवर्तित किया जा सकता है। सभी खुदरा विक्रेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन नई कीमतों को प्रमुखता से प्रदर्शित करें और उनका पालन करें। गैर-अनुपालन को डीपीसीओ और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा, जिसमें ब्याज सहित अतिरिक्त वसूली भी की जा सकती है।

5. उपभोक्ताओं को राहत

केंद्र सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में किफायती बदलाव लाने का प्रयास है। इससे मरीजों को सस्ती और जरूरी दवाएं मिल सकेंगी और इलाज में कोई बाधा नहीं आएगी। स्वास्थ्य मंत्रालय की इस पहल से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, जिससे जनता को व्यापक लाभ मिलेगा।

केंद्र सरकार द्वारा दवाओं की कीमतें तय करने का यह कदम स्वास्थ्य प्रणाली को और सस्ती और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे उपभोक्ताओं को किफायती इलाज मिलेगा और स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे लोगों के लिए राहत होगी। एनपीपीए द्वारा इस नए मूल्य निर्धारण से दवाओं की सटीकता और उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे भारत की स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर और बेहतर होगा।

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