बढ़ते तापमान और प्रदूषण से प्रभावित एक बड़ी झील, जहां पानी की परतें अलग दिखाई दे रही हैं।जलवायु परिवर्तन के कारण प्रभावित होती झील की पारिस्थितिकी

दुनियाभर में बढ़ता तापमान अब जल स्रोतों पर भी गंभीर असर डाल रहा है। हाल ही में सामने आए एक वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि जलवायु परिवर्तन के कारण झीलों का प्राकृतिक शुद्धिकरण तेजी से कमजोर हो रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, झीलों में होने वाली डिनाइट्रिफिकेशन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे पानी में मौजूद अतिरिक्त नाइट्रोजन हटाने की क्षमता करीब 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है। शोधकर्ताओं ने बताया कि पहले सर्दियों में झीलों का पानी आपस में मिल जाता था।

इससे ऑक्सीजन का स्तर संतुलित रहता था। लेकिन अब तापमान बढ़ने के कारण झीलों की ऊपरी और निचली परतें लंबे समय तक अलग बनी रहती हैं। इसका सीधा असर सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों पर पड़ रहा है। यही सूक्ष्मजीव झीलों का प्राकृतिक शुद्धिकरण बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। यह अध्ययन स्विट्जरलैंड की लेक बाल्डेग पर किया गया। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जलवायु परिवर्तन की गति इसी तरह जारी रही, तो आने वाले समय में जल प्रदूषण, शैवाल वृद्धि और ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि झीलों का प्राकृतिक शुद्धिकरण पर्यावरण संतुलन और स्वच्छ जल के लिए बेहद जरूरी है।

FAQ

प्रश्न 1: झीलों का प्राकृतिक शुद्धिकरण क्या है?

झीलों में मौजूद सूक्ष्मजीव पानी से अतिरिक्त नाइट्रोजन और प्रदूषक तत्व हटाते हैं। इसी प्रक्रिया को प्राकृतिक शुद्धिकरण कहा जाता है।

प्रश्न 2: जलवायु परिवर्तन का झीलों पर क्या असर पड़ रहा है?

बढ़ते तापमान के कारण पानी की परतें अलग रहती हैं, जिससे ऑक्सीजन संतुलन बिगड़ता है और शुद्धिकरण प्रक्रिया कमजोर होती है।

प्रश्न 3: इससे कौन-कौन सी समस्याएं बढ़ सकती हैं?

जल प्रदूषण, शैवाल वृद्धि, ऑक्सीजन की कमी और जलीय जीवों पर खतरा बढ़ सकता है।

Prem Chand | Suryoday Samachar

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