केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में आ गई है। इस बार कई छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में गड़बड़ी होने का दावा किया है। कुछ छात्रों का कहना है कि उनकी कॉपी बदल गई, जबकि कुछ ने सप्लीमेंट्री शीट की जांच न होने का आरोप लगाया है। दिल्ली की छात्रा हर्षिता ने दावा किया कि री-इवैल्यूएशन के दौरान उन्हें जो स्कैन कॉपी दिखाई गई, उसमें पहले पेज के बाद किसी दूसरे छात्र के पन्ने जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि अंदर की हैंडराइटिंग उनकी नहीं थी। इस वजह से उन्हें फिजिक्स में केवल 12 अंक मिले और वे फेल हो गईं। वहीं छात्र हर्ष ने आरोप लगाया कि उनकी सप्लीमेंट्री कॉपी की जांच नहीं की गई।
उनका कहना है कि केवल मुख्य कॉपी का मूल्यांकन हुआ, जिससे उनके अंक कम आए। हर्ष के अनुसार उन्हें 85 से अधिक अंक मिलने चाहिए थे, लेकिन उन्हें केवल 73 अंक मिले। इससे पहले वेदांत नाम के छात्र का मामला भी सामने आया था। छात्र के आरोप के बाद CBSE ने जांच की और गलती स्वीकार की। बाद में छात्र के अंक 64 से बढ़ाकर 74 कर दिए गए। अब सोशल मीडिया पर CBSE ऑन स्क्रीन मार्किंग को लेकर बहस तेज हो गई है। छात्र और अभिभावक पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी निगरानी और मजबूत होनी चाहिए ताकि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो।
FAQ
प्रश्न 1: CBSE ऑन स्क्रीन मार्किंग क्या है?
उत्तर: यह डिजिटल प्रक्रिया है जिसमें स्कैन की गई कॉपियों को कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचा जाता है।
प्रश्न 2: छात्रों ने क्या आरोप लगाए हैं?
उत्तर: छात्रों ने कॉपी बदलने और सप्लीमेंट्री शीट गायब होने के आरोप लगाए हैं।
प्रश्न 3: वेदांत मामले में क्या हुआ था?
उत्तर: जांच के बाद CBSE ने गलती मानी और छात्र के अंक बढ़ाए गए।
Prem Chand | Suryoday Samachar

