एक कैटरपिलर चींटियों के बीच कंपन संकेतों के जरिए संवाद स्थापित करता हुआ।कैटरपिलर चींटियों की ताल मिलाकर संवाद करते हुए।

Durgesh Sharma | Suryoday Samachar

प्रकृति की दुनिया में संवाद के कई रोचक तरीके हैं। हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि कुछ कैटरपिलर चींटियों से जुड़ने के लिए उनकी ही ताल अपनाते हैं। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक एंट कम्युनिकेशन रिदम से जोड़कर देख रहे हैं।

शोध के अनुसार, कुछ कैटरपिलर अपने शरीर को हल्के कंपन के साथ हिलाते हैं। यह कंपन बिल्कुल वैसा होता है जैसा चींटियां आपस में संवाद के लिए करती हैं। जब कैटरपिलर इस एंट कम्युनिकेशन रिदम को सही ढंग से दोहराते हैं, तो चींटियां उन्हें अपना साथी मान लेती हैं। बदले में उन्हें सुरक्षा और कभी-कभी भोजन भी मिलता है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन कैटरपिलर का जीवन पूरी तरह चींटियों पर निर्भर होता है, वे अधिक सटीक और जटिल ताल बना सकते हैं। यह ताल चींटी रानी के कंपन संकेतों से भी मेल खाती है। इससे स्पष्ट होता है कि एंट कम्युनिकेशन रिदम केवल ध्वनि नहीं, बल्कि एक भरोसे का संकेत भी है।

यह खोज बताती है कि ताल और लय केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं हैं। कीट जगत में भी जटिल संचार प्रणाली मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस विषय पर और शोध से पशु व्यवहार को बेहतर समझा जा सकेगा।

FAQ

प्रश्न 1: एंट कम्युनिकेशन रिदम क्या है?
यह चींटियों द्वारा कंपन के जरिए किया जाने वाला संवाद है।

प्रश्न 2: कैटरपिलर को इससे क्या लाभ मिलता है?
उन्हें सुरक्षा और भोजन मिलता है।

प्रश्न 3: क्या यह क्षमता सभी कैटरपिलर में होती है?
नहीं, केवल वे प्रजातियां जिनका जीवन चींटियों पर निर्भर है।

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