मुंबई के स्थानीय निकाय चुनावों में जहां राष्ट्रवादी दलों का दबदबा देखने को मिला, वहीं बंद्रा में करेन डी’मेलो की जीत ने राजनीतिक समीकरणों को अलग दिशा दी। बंद्रा पश्चिम से कांग्रेस उम्मीदवार करेन डी’मेलो ने भाजपा और शिवसेना जैसे मजबूत दलों को हराकर यह साबित किया कि स्थानीय स्तर पर काम और भरोसा अब भी सबसे बड़ा मुद्दा है। चुनाव बृहन्मुंबई महानगरपालिका के लिए हुए थे। पूरे शहर में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना का प्रभाव रहा, लेकिन बंद्रा पश्चिम में मतदाताओं ने अलग फैसला सुनाया। यहां हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदायों ने मिलकर करेन डी’मेलो को समर्थन दिया।
करेन डी’मेलो इससे पहले 2012 से 2017 तक नगरसेविका रह चुकी हैं। उस दौरान उन्होंने बिना किसी भेदभाव के स्थानीय समस्याओं पर काम किया। पानी, सफाई, शिक्षा और गरीबों से जुड़े मुद्दे उनकी प्राथमिकता रहे। यही वजह है कि बंद्रा में करेन डी’मेलो की जीत को जनता के भरोसे की जीत माना जा रहा है। करेन डी’मेलो ने कहा कि उनकी आस्था उन्हें दूसरों की सेवा के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी समुदायों के लिए समान रूप से काम करेंगी। यह जीत केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द का भी प्रतीक है।
यह रिपोर्ट Durgesh Sharma | Suryoday Samachar के लिए तैयार की गई है।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: बंद्रा में करेन डी’मेलो की जीत क्यों खास मानी जा रही है?
क्योंकि राष्ट्रवादी लहर के बावजूद उन्होंने सभी समुदायों का भरोसा जीता।
प्रश्न 2: करेन डी’मेलो किस पार्टी से जीती हैं?
वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उम्मीदवार हैं।
प्रश्न 3: उनकी जीत का मुख्य कारण क्या रहा?
स्थानीय मुद्दों पर लगातार काम और निष्पक्ष छवि।

