भारत में इलेक्ट्रिक वाहन कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में क्रांति ला रहे हैं। केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) के तहत घरेलू कचरा संग्रहण में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को एक परिवर्तनकारी पहल बताया है। यह पहल वायु और ध्वनि प्रदूषण में कमी लाने के साथ-साथ शहरों में साफ-सफाई की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बना रही है।

स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सॉल्यूशन

स्वच्छ भारत मिशन के तहत, भारत सरकार ने पारंपरिक डीजल चालित कचरा वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक ऑटो और ई-रिक्शा को प्राथमिकता देना शुरू किया है। इससे शहरी इलाकों में कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी देखने को मिल रही है।

उदाहरणस्वरूप, आंध्र प्रदेश के गुंटूर शहर में 200 से अधिक इलेक्ट्रिक ऑटो की मदद से घर-घर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। इसमें जीपीएस ट्रैकिंग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, और कम प्रदूषण जैसी विशेषताएं शामिल हैं।

चेन्नई में ई-रिक्शा से नई शुरुआत

ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (GCC) ने भी एक बड़ी पहल की है। आज शहर में 5,478 बैटरी चालित ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं, जो 15 ज़ोन में फैले 24,000+ सड़कों और 21 लाख घरों में कचरा संग्रहण का कार्य करते हैं। यह एक सस्टेनेबल मॉडल बन चुका है।

इन ई-रिक्शा में ऑडियो सिस्टम भी लगे हैं, जो वेस्ट सेपरेशन (कचरा अलग करने) के लिए जन जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं। साथ ही, यह परियोजना 6,000 से अधिक लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रही है।

इंदौर मॉडल: परिचालन दक्षता और पर्यावरण सुरक्षा

इंदौर नगर निगम ने पारंपरिक डीजल ट्रकों की जगह 100 इलेक्ट्रिक गाड़ियों को डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में लगाया है। इससे न सिर्फ पर्यावरण की रक्षा हो रही है बल्कि आर्थिक बचत भी हो रही है।

महत्वपूर्ण आंकड़े:

  • सालाना ईंधन लागत में 5.97 करोड़ रुपए की बचत
  • रखरखाव में कमी: कोई इंजन ऑयल, क्लच रिप्लेसमेंट या हाई सर्विसिंग लागत नहीं
  • 20 सौर चार्जिंग स्टेशन: जो 10kW सौर पैनलों से रोज़ाना 800-1000 यूनिट ऊर्जा उत्पन्न करते हैं
  • एक स्टेशन से 80-100 वाहनों को चार्ज किया जा सकता है

पर्यावरणीय लाभ

  • शून्य उत्सर्जन वाहन (Zero Emission Vehicles)
  • कम ध्वनि प्रदूषण
  • डीजल की बचत
  • ग्रीनहाउस गैसों में भारी कटौती

आर्थिक दृष्टिकोण से फायदेमंद

  • ऑपरेशनल कॉस्ट में भारी गिरावट
  • लंबी अवधि में रखरखाव की लागत नगण्य
  • स्मार्ट चार्जिंग से बिजली पर खर्च में भी बचत

यूएन और वैश्विक सहयोग

यह परियोजना संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) और ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी (GEF) द्वारा समर्थित है। सस्टेनेबल सिटीज इंटीग्रेटेड पायलट अप्रोच (SCIAP) के तहत भारत के कई शहरों में इसका क्रियान्वयन हो रहा है।

इलेक्ट्रिक कचरा वाहनों का भविष्य: स्मार्ट और हरित शहरों की ओर

भारत में क्लीन मोबिलिटी और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का यह तालमेल भविष्य की शहरी व्यवस्थाओं की नींव रख रहा है। यह न केवल स्वच्छता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि हरित भविष्य के लिए भी एक आदर्श मॉडल है।

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