यूरोप की भू-राजनीतिक रणनीति में हाल के दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। यूरोप ग्रीनलैंड रणनीति इस बदलाव का केंद्र बनकर उभरी है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा NATO के साथ ग्रीनलैंड को लेकर किए गए फ्रेमवर्क समझौते का सीधा असर यूरोप की सुरक्षा और संसाधन नीति पर पड़ रहा है। ग्रीनलैंड, जो भौगोलिक रूप से आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, यूरोप और उत्तरी अटलांटिक सुरक्षा के लिए अहम माना जाता है। NATO के तहत यूरोपीय देश पहले से ही इस क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं। अब खनिज अधिकारों और रक्षा सहयोग के नए ढांचे से यूरोप को दुर्लभ खनिजों की स्थिर आपूर्ति का अवसर मिल सकता है।
यूरोप ग्रीनलैंड रणनीति का एक बड़ा उद्देश्य चीन पर निर्भरता कम करना है। इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उद्योग और उन्नत तकनीक के लिए जरूरी दुर्लभ खनिज यूरोपीय अर्थव्यवस्था की प्राथमिकता बन चुके हैं। ग्रीनलैंड में मौजूद संसाधन इस जरूरत को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। यूरोपीय संघ के कई नीति विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को और मजबूत करेगा। साथ ही, यह यूरोप को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक आत्मनिर्भर बनने का अवसर देगा।
— Durgesh Sharma | Suryoday Samachar
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: यूरोप के लिए ग्रीनलैंड क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति और दुर्लभ खनिज भंडार यूरोप की सुरक्षा और औद्योगिक जरूरतों के लिए अहम हैं।
प्रश्न 2: क्या इस रणनीति से यूरोप को आर्थिक लाभ होगा?
उत्तर: हां, इससे यूरोप को खनिज आपूर्ति में स्थिरता और नई औद्योगिक संभावनाएं मिल सकती हैं।
प्रश्न 3: NATO की भूमिका क्या है?
उत्तर: NATO यूरोप और अमेरिका के बीच सुरक्षा और संसाधन सहयोग का मुख्य मंच है।

