विकसित भारत के लिए IICA-NPC सहयोग को लेकर हाल ही में एक अहम पहल सामने आई है, जिसमें नीति, प्रशिक्षण और उत्पादकता से जुड़े मुद्दों पर साझा सोच विकसित करने पर जोर दिया गया। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स और नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल के बीच यह संवाद देश को दीर्घकालिक रूप से मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
— Suryoday Samachar | Durgesh Sharma
इस अवसर पर Indian Institute of Corporate Affairs (IICA) ने National Productivity Council (NPC) के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की। बैठक में प्रशिक्षण, अनुसंधान, उत्पादकता, स्थिरता और अनुपालन जैसे विषयों पर संभावित साझेदारी को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
IICA के नेतृत्व ने कहा कि बदलती औद्योगिक जरूरतों के बीच संस्थानों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप खुद को ढालना होगा। वहीं NPC की ओर से बताया गया कि परिषद लंबे समय से उद्योग, MSME, कृषि और सेवाओं में उत्पादकता बढ़ाने के लिए काम कर रही है। पर्यावरण अनुपालन, ESG, ऊर्जा दक्षता और BRSR रिपोर्टिंग जैसे क्षेत्रों में NPC की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
दोनों पक्षों ने माना कि विकसित भारत के लिए IICA-NPC सहयोग नीति निर्माण और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के बीच की दूरी को कम कर सकता है। इस साझेदारी से न केवल सरकारी योजनाओं को बल मिलेगा, बल्कि निजी क्षेत्र को भी व्यावहारिक समाधान मिल सकेंगे।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. IICA-NPC सहयोग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
नीति, प्रशिक्षण और उत्पादकता के जरिए विकसित भारत के लक्ष्य को समर्थन देना।
Q2. इस सहयोग से किसे लाभ होगा?
सरकार, उद्योग, MSME, स्टार्टअप्स और नीति संस्थानों को।
Q3. किन क्षेत्रों में संयुक्त काम होगा?
प्रशिक्षण, अनुसंधान, स्थिरता, ESG और अनुपालन क्षमता निर्माण।

