झारखंड के एक मॉडल स्कूल का प्रतीकात्मक दृश्य, जहां प्रवेश परीक्षा परिणाम में देरी और कम सफलता प्रतिशत के कारण नामांकन प्रक्रिया प्रभावित हुई है।झारखंड मॉडल स्कूलों में प्रवेश परीक्षा के बाद बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने की स्थिति।

झारखंड में झारखंड मॉडल स्कूल प्रवेश प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। इस वर्ष मॉडल स्कूल प्रवेश परीक्षा में कुल 3479 छात्र-छात्राएं शामिल हुए, लेकिन केवल 1165 अभ्यर्थी ही सफल हो सके। इसका मतलब है कि करीब 65 प्रतिशत सीटें खाली रहने की संभावना बन गई है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। परिषद के अनुसार प्रवेश परीक्षा के परिणाम में हुई देरी और कठिन परीक्षा पैटर्न के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी सफल नहीं हो पाए। वहीं कई अभिभावक परिणाम का इंतजार करते रहे, जिसके चलते वे बच्चों का अन्य स्कूलों में समय पर नामांकन भी नहीं करा सके।

अधिकारियों ने बताया कि खाली सीटों को अब स्थानीय स्तर पर भरा जाएगा ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सके। साथ ही अगले सत्र से प्रवेश परीक्षा और नामांकन प्रक्रिया को सरल बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। झारखंड के मॉडल स्कूल ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को कम खर्च में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में झारखंड मॉडल स्कूल प्रवेश व्यवस्था में सुधार की मांग लगातार उठ रही है।

FAQ

प्रश्न: इस वर्ष कितने छात्र मॉडल स्कूल प्रवेश परीक्षा में सफल हुए?
उत्तर: कुल 1165 छात्र-छात्राएं सफल हुए हैं।

प्रश्न: खाली सीटों का क्या होगा?
उत्तर: शिक्षा विभाग स्थानीय स्तर पर नामांकन कर सीटें भरने की तैयारी कर रहा है।

प्रश्न: मॉडल स्कूलों में पढ़ाई किस माध्यम से होती है?
उत्तर: मॉडल स्कूलों में मुख्य रूप से अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दी जाती है।

Prem Chand | Suryoday Samachar

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