Justice BV Nagarathna :- सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए सीबीएसई की तीसरी भाषा (Third Language) नीति को लेकर चिंता व्यक्त की है। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी शुरू करने वाले छात्रों पर इस स्तर पर नई भाषा लागू करना अनावश्यक शैक्षणिक दबाव पैदा कर सकता है।

जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की कि यदि छात्रों को तीसरी भाषा पढ़ानी ही है, तो इसकी शुरुआत कक्षा 5 या 6 से की जानी चाहिए। उनके अनुसार, कम उम्र में नई भाषा सीखना अपेक्षाकृत आसान होता है, जबकि कक्षा 9 में छात्र पहले से ही बोर्ड परीक्षा की तैयारी और बढ़ते पाठ्यक्रम के दबाव का सामना कर रहे होते हैं।

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यह मामला सीबीएसई की उस संशोधित भाषा नीति से जुड़ा है, जिसके तहत 2026-27 सत्र से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य की गई है। हालांकि, सीबीएसई ने वर्तमान बैच को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा का बोर्ड परीक्षा में अलग प्रश्नपत्र नहीं होगा, लेकिन स्कूल स्तर पर उसका मूल्यांकन किया जाएगा और उसे उत्तीर्ण करना आवश्यक रहेगा।

 

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि शिक्षा संबंधी नीतियां लागू करते समय छात्रों के मानसिक दबाव, शिक्षकों की उपलब्धता और आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नीति को अचानक लागू करने से छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

 

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस नीति पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है और मामला अभी विचाराधीन है। सीबीएसई की तीन-भाषा नीति फिलहाल लागू है, जबकि अदालत में इसकी वैधता और क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सुनवाई जारी रहेगी।

 

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भाषा सीखना छात्रों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके कार्यान्वयन का समय और तरीका भी उतना ही अहम है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां भविष्य में इस नीति के क्रियान्वयन और शिक्षा सुधारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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