भारतीय हिन्दू कैलेंडर का एक बहुत ही पवित्र और विशेष महीना है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। इस महीने के दौरान, श्रद्धालु अपनी भक्ति और आस्था को व्यक्त करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करते हैं। जैसे ही सावन महीने की शुरुआत होती है, देशभर में प्रमुख तीर्थ स्थलों पर ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजने लगते हैं।

देश के विभिन्न प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे वाराणसी, हरिद्वार और प्रयागराज में इस दिन का विशेष महत्व होता है। शुक्रवार की सुबह इन तीर्थ स्थलों पर हजारों शिव भक्तों ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की, जलाभिषेक किया और लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी श्रद्धा अर्पित की।

देवभूमि में ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे

हरिद्वार, जिसे देवभूमि भी कहा जाता है, में सावन के पहले दिन खास जोश और उल्लास के साथ ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंज रहे थे। सुबह से ही ‘हर की पौड़ी’ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। शिव भक्तों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और गंगाजल भरकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। यह दृश्य न केवल आध्यात्मिक था, बल्कि भक्ति, सेवा और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

दक्षिणेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़

कनखल स्थित दक्षिणेश्वर महादेव मंदिर में भी भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। यह स्थान भगवान शिव की ससुराल के रूप में प्रसिद्ध है, और यहां पूजा-अर्चना करने से भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है। भक्तों का मानना है कि यही वह स्थान है, जहां से भोलेनाथ सृष्टि का संचालन करते हैं।

हरिद्वार में प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं का पुख्ता इंतजाम किया था, जिससे श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के पूजा-अर्चना कर सके। जगह-जगह पुलिस बल तैनात था, और मेडिकल कैंप और जलपान केंद्र की व्यवस्था से श्रद्धालुओं को राहत मिल रही थी। कांवड़ यात्रा में शामिल भक्तों का उत्साह भी देखने लायक था।

काशी विश्वनाथ मंदिर में ‘मंगला आरती’ के साथ पूजा की शुरुआत

वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के पहले दिन ‘मंगला आरती’ के साथ पूजा की शुरुआत की गई। इसके बाद मंदिर के द्वार आम दर्शन के लिए खोल दिए गए, और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या काशी विश्वनाथ के दर्शन करने के लिए आई। मंदिर परिसर में ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंज उठे, और भक्तों ने खुशी-खुशी बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया।

वाराणसी मंडलायुक्त ने भी श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की और दर्शन के लिए पूरी व्यवस्था का ध्यान रखा। काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रशासन ने भक्तों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की थी, जिससे सभी श्रद्धालुओं को सुखद अनुभव हुआ। एक महिला श्रद्धालु ने कहा, “सावन का पहला दिन है, और व्यवस्था बहुत अच्छी है। सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है।”

भगवान शिव के विविध रूपों की पूजा

प्रयागराज में भी इस दिन का महत्व बहुत अधिक था। लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान करने पहुंचे और यमुना किनारे स्थित श्रीमनकामेश्वर मंदिर में भगवान शिव के विविध रूपों की पूजा-अर्चना की। विशेष रूप से, भक्त गंगाजल, दूध, बेलपत्र आदि लेकर मंदिर पहुंचे। यहां भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।

प्रयागराज में दशाश्वमेध घाट पर भी भक्तों ने पवित्र गंगा जल लेने के लिए एकत्रित हो गए। इस दिन का विशेष महत्व यह माना जाता है कि भगवान शिव को अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

सावन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भक्तों का उत्साह

यह श्रद्धा, आस्था और समर्पण का प्रतीक है। भगवान शिव की पूजा में भक्तों का सच्चा समर्पण देखा जाता है, जो उनके जीवन में शांति, समृद्धि और सद्गति की कामना करते हैं। पूरे देशभर में सावन के पहले दिन मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा, और वे अपनी भक्ति के माध्यम से समाज में एकता, प्रेम और सद्भावना का संदेश दे रहे थे।

देशभर में शिव भक्तों के उत्साह और भगवान शिव के प्रति श्रद्धा को और अधिक सुदृढ़ किया है। यह समय है जब भक्ति, सेवा और समर्पण की भावना को जीते हुए, हर श्रद्धालु भगवान शिव के आशीर्वाद से अपने जीवन को अधिक पवित्र और समृद्ध बनाता है।

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