धर्म डेस्क, नई दिल्ली। घर का पूजाघर आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहीं से पूरे घर में शांति और संतुलन का प्रवाह होता है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर पूजाघर में अशुभ मूर्तियां रखी हों, तो यह सकारात्मकता बाधित हो सकती है। कई बार लोग अनजाने में ऐसी मूर्तियां या तस्वीरें रख लेते हैं, जो गृह-क्लेश और मानसिक तनाव का कारण बन सकती हैं।
वास्तु शास्त्र में सबसे पहले खंडित या टूटी हुई मूर्तियों को अशुभ माना गया है। ऐसी मूर्तियों की पूजा से लाभ के बजाय नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इसी तरह, भगवान के उग्र या रौद्र रूप वाली मूर्तियां भी घर के मंदिर के लिए उपयुक्त नहीं मानी जातीं। माना जाता है कि इससे घर का वातावरण तनावपूर्ण हो सकता है।
इसके अलावा, एक ही देवता की दो या उससे अधिक मूर्तियां रखना भी वास्तु दोष पैदा कर सकता है। इससे ऊर्जा का संतुलन बिगड़ता है और मानसिक भ्रम बढ़ सकता है। पूजाघर में मूर्तियों को आमने-सामने रखना भी उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इससे पारिवारिक मतभेद बढ़ने की मान्यता है।
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, पूजाघर में अशुभ मूर्तियां हटाकर शांत, सौम्य और अखंड स्वरूप वाली मूर्तियां रखने से घर में सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं। साथ ही मूर्तियों की नियमित सफाई और देखभाल भी जरूरी है।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: क्या टूटी मूर्ति को घर में रखना अशुभ होता है?
हां, वास्तु के अनुसार खंडित मूर्ति को पूजाघर में रखना शुभ नहीं माना जाता।
प्रश्न 2: अशुभ मूर्तियों का क्या करें?
उन्हें सम्मानपूर्वक किसी पवित्र स्थान पर रखें या विधिवत विसर्जन करें।
प्रश्न 3: क्या एक ही भगवान की कई मूर्तियां रख सकते हैं?
वास्तु के अनुसार, एक ही स्थान पर एक देवता की एक ही मूर्ति रखना बेहतर माना जाता है।
अस्वीकरण: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और सामान्य वास्तु जानकारी पर आधारित है। Suryoday Samachar अंधविश्वास के खिलाफ है। पाठक अपने विवेक का प्रयोग करें।
