देश की शीर्ष अदालत Supreme Court of India ने गुरुवार को UGC नए नियमों पर रोक लगाते हुए अहम अंतरिम आदेश दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक नए नियम पूरी तरह स्पष्ट और संतुलित नहीं होंगे, तब तक उन्हें लागू नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद उच्च शिक्षा संस्थानों में फिलहाल 2012 के UGC विनियम ही लागू रहेंगे।
मुख्य न्यायाधीश Justice Suryakant और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि नए नियमों के कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं और उनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो इससे समाज में विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील विष्णु जैन ने दलील दी कि नए नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा सीमित वर्गों तक रखी गई है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ है। इस पर CJI ने सवाल उठाया कि यदि छात्रों के बीच भेदभाव होता है और जाति स्पष्ट नहीं है, तो ऐसे मामलों में कौन सा प्रावधान लागू होगा।
कोर्ट ने माना कि शिक्षा परिसरों, खासकर हॉस्टलों में, इस तरह के नियम छात्रों के बीच अलगाव की भावना बढ़ा सकते हैं। इसी आधार पर UGC नए नियमों पर रोक लगाते हुए 19 मार्च को अगली सुनवाई तय की गई।
यह रिपोर्ट Suryoday Samachar | Durgesh Sharma के लिए तैयार की गई है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. UGC नए नियमों पर रोक क्यों लगी?
नियमों की अस्पष्ट भाषा और संभावित दुरुपयोग की आशंका के कारण।
Q2. अभी कौन से नियम लागू रहेंगे?
अगले आदेश तक 2012 के UGC विनियम लागू रहेंगे।
Q3. अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

