विटामिन-डी शरीर के लिए एक आवश्यक फैट-सॉल्युबल विटामिन है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने, इम्यून सिस्टम को बेहतर करने और कैल्शियम अवशोषण में मदद करता है। धूप इसका मुख्य स्रोत है, लेकिन कई लोग आजकल इसके सप्लीमेंट्स का सेवन कर रहे हैं।

लेकिन क्या ज्यादा विटामिन-डी नुकसान कर सकता है? हां! और जानिए कैसे

जिस तरह कोई दवा सीमित मात्रा में ही लाभ देती है, वैसे ही विटामिन-डी की भी एक सुरक्षित सीमा होती है। अगर आप बिना डॉक्टरी सलाह के लंबे समय तक विटामिन-डी के सप्लीमेंट्स ले रहे हैं, तो यह टॉक्सिसिटी (Vitamin D Toxicity) का कारण बन सकता है।

विटामिन-डी ओवरडोज के प्रमुख लक्षण

  1. जी मिचलाना और उल्टी
  2. कमज़ोरी और थकान
  3. मूत्र का अधिक बनना
  4. डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण)
  5. मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी
  6. भूख में कमी
  7. किडनी में पथरी
  8. कैल्शियम का खतरनाक स्तर तक बढ़ना (Hypercalcemia)

क्यों होती है विटामिन-डी की ओवरडोज़?

  • बिना जांच के सप्लीमेंट्स का सेवन
  • लंबी अवधि तक हाई डोज लेना (4000 IU/day से अधिक)
  • डॉक्टर की सलाह के बिना खुद से मेडिसिन लेना
  • एक साथ मल्टीविटामिन और विटामिन-डी लेना

Hypercalcemia: सबसे बड़ा खतरा

विटामिन-डी की अधिकता से शरीर में कैल्शियम का स्तर इतना बढ़ सकता है कि वह किडनी, हृदय और दिमाग को नुकसान पहुंचाने लगे।
Hypercalcemia की स्थिति में व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ सकती है।

आपको कितनी मात्रा में चाहिए विटामिन-डी?

उम्र/स्थितिअनुशंसित दैनिक खुराक
0-12 माह400 IU
1-70 वर्ष600 IU
70+ वर्ष800 IU
गर्भवती/स्तनपान कराने वाली600 IU

✅ अधिकतम सुरक्षित सीमा: 4000 IU प्रतिदिन
❌ इससे अधिक सेवन पर सख्त डॉक्टरी निगरानी जरूरी है।

सावधान! सप्लीमेंट से पहले ये जांच कराएं

  • 25(OH)D ब्लड टेस्ट
    इससे शरीर में मौजूद विटामिन-डी की सही मात्रा पता चलती है।
  • टेस्ट रिपोर्ट में यदि स्तर 20-50 ng/mL के बीच है, तो सामान्य है।
  • 100 ng/mL से अधिक होने पर ओवरडोज का खतरा बढ़ जाता है।

विटामिन-डी का सुरक्षित स्रोत

  • सुबह की धूप (सुबह 7 से 9 बजे के बीच)
  • अंडे की जर्दी, फैटी फिश (साल्मन, ट्यूना)
  • फोर्टिफाइड दूध और अनाज
  • मशरूम
  • और सबसे जरूरी: डॉक्टर की सलाह

विटामिन-डी आपकी हड्डियों और शरीर के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन इसकी बिना जांच और सलाह के ओवरडोज़ आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
“ज्यादा अच्छा” हमेशा अच्छा नहीं होता। इसलिए सप्लीमेंट लेने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें और अपने शरीर की जरूरतों को समझें।

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